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क्या आप एक मूर्ख या बुद्धिमान स्त्री हैं?



याकूब 3:14-17 में, हमें स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि एक मूर्ख और एक बुद्धिमान औरत कैसी होती है। दुःखद रूप से, हमारे इस संसार में बहुत सी मूर्ख औरतें हैं। वे परमेश्वर को नहीं जानती हैं और न ही उसकी आराधना करना चाहती हैं। वे अपनी खुद की ईश्वर बनना, अपने खुद के नियम बनाना और ऐसा जीवन जीना चाहती हैं जो उनको संतुष्ट करे। वे परमेश्वर की आज्ञा मानने की बजाय, अपनी इच्छानुसार चलने के लिए परमेश्वर के वचन को भी गलत अर्थों में प्रस्तुत कर देती हैं।

पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्ड न करना, और न तो झूठ बोलना। यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है। इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्कर्म भी होता है। (याकूब 3:14-16)

1. मूर्ख स्त्रियाँ "कड़वी डाह/ईष्या" रखती हैं जैसाकि याकूब ने इसके संबंध में कहा है। जब मैं इंस्टाग्राम पर अपने बाथटब (नहाने का टब) की फोटो दिखाती हूँ तो वे स्त्रियाँ टिप्पणी (कमैंट्) करेंगी, "मैं निश्चित रूप से ऐसे बाथटब को बर्दाश्त नहीं कर सकती हूँ!" आज महिलाओं के बीच अत्यधिक कड़वी डाह/ईष्या है। "वे लालसा करती हैं और पाती नहीं।" इसीलिये परमेश्वर हमें जो हमारे पास है, उसी में संतुष्ट रहने की आज्ञा देता है। यदि आप अपने मन में किसी के रूप, वज़न, पति, घर, स्वास्थ्य या यहां तक कि बाथटब के लिए भी अत्यधिक डाह/ईष्या रखती हैं तो आप एक मूर्ख स्त्री हैं।

2. मूर्ख स्त्रियाँ "झगड़े" उत्पन्न करती हैं। वे दूसरों की झूठी निंदा करने व लोगों के बीच झगड़े/विवाद उत्पन्न कराने से आनंदित होती हैं। उनके घरों में शांति कम रहती है। वे स्वयं को सही ठहराने पर अड़ी रहने और अपने ही मार्ग को प्राप्त करने के कारण, अपने घरों को अपने ही हाथों से ढा देती हैं। वे अपने पतियों की अधीनता में रहने से इंकार करती हैं, परंतु इसके विपरीत बलपूर्वक अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करती हैं।

3. मूर्ख स्त्रियाँ "सांसारिक" होती हैं। सांसारिक स्त्रियाँ इस पृथ्वी की वस्तुओं से संबंध रखती हैं जिनमें घृणित और बुरी चीज़ें शामिल हैं। वे सांसारिक राज्य की स्त्रियाँ हैं न कि स्वर्गीय राज्य की, इसीलिए वे अपना जीवन केवल यहीं के लिए और वर्तमान के लिए और उन चीजों के लिए जीती हैं जिन्हें वे अपने लिए प्राप्त कर सकती हैं। "वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्ड करती हैं" (फिलिप्पियों 3:19)। वे अपना धन स्वर्ग की बजाय पृथ्वी पर इकट्ठा करती हैं। वे संसार की मित्र और परमेश्वर की शत्रु होती हैं। वे उस प्रकार के कपड़े पहनती और व्यवहार करती हैं जो उनको भाता है, न कि प्रभु परमेश्वर को।

4. मूर्ख स्त्रियाँ "कामुक" होती हैं। 1828 वैबस्टर डिक्शनरी के अनुसार, "वे अपने भाव या पहचान की संतुष्टि के प्रति समर्पित हैं; जो इच्छाओं के भोग के लिए दे दी गई हैं।" वे इसकी परवाह किए बिना कि यह उनके स्वयं के लिए और दूसरों के लिए कितना हानिकारक हो सकता है, अपने आपको अपनी सारी इच्छाओं को सौंप देती हैं। वे निर्लज्ज/उत्तेजित करने वाले(सैक्सी) कपड़े पहनती हैं जो दूसरी पत्नियों के पतियों को उत्तेजित करते हैं। वे अपने आपको बिना सोचे-समझे, अत्यधिक खाने, शराब पीने और अनैतिक यौन संबंध बनाने के लिए सौंप देती हैं।

5. मूर्ख स्त्रियाँ शैतानी होती हैं। "वे दुष्ट(शैतान) के लक्षणों को ग्रहण करने वाली; क्रूर; बहुत बुराई करने वाली और हानिकर; द्वेष करनेवाली होती हैं।" वे उस प्रकार की स्त्रियाँ नहीं होती हैं जिनकी मौज़ूदगी में आप रहना चाहेंगे क्योंकि वे विनाश करने से प्रसन्न रहती हैं। वे शैतान की प्रतिनिधि हैं और उसके कार्यों को कर रही हैं जोकि बाइबल में ईज़ेबेल का चरित्र है।

6. मूर्ख स्त्रियाँ "गड़बड़ी/भ्रम और हर बुरे काम" को उत्पन्न करती हैं। क्या आप जानना चाहते हैं कि अपनी संस्कृति या माहौल में इतनी गड़बड़ी(अस्तव्यस्तता) क्यों है? मूर्ख महिलाओं ने, परमेश्वर द्वारा उनके लिए ठहराई गई भूमिका में संतुष्ट न होने के कारण, अपने परिवारों को तबाह कर दिया है परंतु इसके विपरीत वे पुरुषों की भूमिका का पीछा करती हैं जिसके परिणामस्वरूप उनकी शादियाँ और बच्चे भी तबाह हो जाते हैं। इसने हमारी संस्कृति या माहौल में शासन प्रणाली से लेकर परिवार तक हर स्तर पर गड़बड़ी को पैदा कर दिया है। बच्चों को सिखाया जाता है कि वे जिस लिंग(पुरुष या स्त्री) को चाहते हैं उसे अपना सकते हैं! मैं इस बारे में निश्चित नहीं हूँ कि इससे अधिक गड़बड़ी और बुराई और क्या हो सकती है।

7. बुद्धिमान स्त्रियाँ पवित्र, शांतिपूर्ण, सभ्य, प्रार्थना/विनती के प्रति सहज, दया और अच्छे फलों से भरी, बिना भेदभाव, बिना ढोंग/कपट के और नम्र होती हैं (याकूब 3:17)। "भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है" (नीतिवचन 31:10)। इस प्रकार की बुद्धिमान स्त्रियाँ सचमुच दुर्लभ हैं। वे हर प्रकार की बुराई के बीच रहने से बचती हैं। वे अपने घरों को भी इससे बचाती हैं। वे सभी पुरुषों के साथ शांति का पीछा करती हैं। वे इस बात को जानते हुए कि हम सभी के जीवनों में संघर्ष होते हैं, लोगों के साथ विनम्र होती हैं और इसलिए उनपर दया और अनुग्रह बरसाती हैं।

8. वे कलीसियाओं में अगुआ और शिक्षक नहीं होती हैं। नहीं, बल्कि वे शांत और पूरी अधीनता के साथ सीखती हैं। वे सादगी से कपड़े पहनती हैं और अच्छे कामों से अपने आपको संवारती हैं और अपने पतियों के अधीन रहती हैं। वे घर को संभालने के साथ, यदि वे ऐसा करने में समर्थ हैं, बच्चों को जन्म देने और उनका पालन पोषण करने से प्रेम करती हैं। वे परमेश्वर द्वारा निर्धारित अपनी भूमिका से प्रेम करती हैं और एक स्त्री होने के लिए उसकी धन्यवादी होती हैं। उनमें पुरुषों से मुकाबला करने और उनके जैसे बनने की कोई इच्छा नहीं होती। वे एक स्त्री को जैसा उचित है, वैसा व्यवहार करने वाली बनना चाहती हैं जो अपने प्रभु और उद्धारकर्ता परमेश्वर की आज्ञा मानने और उसके लिए जीवन जीने के द्वारा उससे प्रेम करती हैं।

तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है। याकूब 3:13

Credit: Lori Alexander(Transformed wife)
Translated by Shivani kandera

योगा पैंट्स - लैगिंग्स


 लड़कियों को सादगी व संकोचशीलता से वस्त्र पहनने के लिए कहना, उन्हें शर्मिंदा करना नहीं है।
(लोरी अलैक्ज़ेंडर द्वारा लेख)

             एक "नारी अधिकारवादी आकस्मिक टोली (feminist flashmob)" के अनुसार, लघु माध्यमिक स्तर की छात्राओं को लैगिंग्स पहनने से मना करना उन्हें शर्मसार करना है और यह बलात्कारी-संस्कृति को बढ़ावा देता है।

मैं आपको बता सकती हूँ कि यह बात मुझे अर्थहीन/विवेकहीन जान पड़ती है और इन महिलाओं में बुद्धि नहीं है। ये मूर्ख महिलाएँ हैं। किस प्रकार जवान लड़कियों को असभ्य कपड़े पहनने से मना करना उन्हें शर्मिंदा करता है और बलात्कारी-संस्कृति को बढ़ावा देता है? इस लेख में एक नारी अधिकारवादी ने ट्वीट किया, "बलात्कारी-संस्कृतियां जब हम 13 वर्षीय लड़कियों को लैगिंग्स/चुस्त पैंट पहनने से मना करते हैं इस कारण से कि इससे लड़कों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित होता है।"  बेशक़ हमें 13 वर्ष की लड़कियों को यह सिखाना आवश्यक है कि जो वे पहनती हैं वह लड़कों को प्रभावित करता है। यह लिंगों पर आधारित वह अंतर है जोकि परमेश्वर द्वारा सृजा गया है।

नारी अधिकारवादी हल यह पूछता है कि क्यों उन्हें "लड़कियों को छिपाकर/ढ़ककर रखना चाहिए बजाय इसके कि.....लड़कों को यह सिखाया जाए कि वे अति लिंगवादी सुअर ना बनें"। और "लड़कों को महिलाओं का आदर करना चाहिए इस बात पर ध्यान दिए बिना कि वे क्या पहने हुई हैं।" मैं क्षमा चाहती हूँ परंतु स्त्रियों को सलीकेदार वस्त्र पहनने व शादी होने तक कुंवारी बने रहने के लिए कहना और उन्हें स्त्रियोचित व्यवहार करने के लिए सिखाना, उन्हें शर्मसार करना नहीं है; ये सभी बातें परमेश्वर एक स्त्री में चाहते हैं। ऐसा करना, उनके प्रति प्रेम में उन्हें सत्य बताना है।

लैगिंग्स/चुस्त पैंट अविनीत हैं। ये तंग और शरीर से चिपकी रहने वाली हैं और हरएक घुमाव को प्रदर्शित करती हैं। पुरुष और यहां तक कि किशोर लड़के भी महिलाओं के शरीरों की ओर आकर्षित होते हैं, इस बात की परवाह किए बिना कि नारी अधिकारवादी कितना अधिक परिवर्तन करके नयापन लाना चाहते हैं और पुरुषों को बताना चाहते हैं कि उन्हें कैसे प्रतिक्रिया करनी चाहिए और उन्हें किन चीज़ों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके पास क्या अधिकार है कि वे पुरुषों में परिवर्तन की मांग करे यद्यपि वे अपनी इच्छानुसार प्रतिक्रिया, पहनावा और कार्य कर सकती हैं? एक भाई के ठोकर खाने या लड़खड़ाने का कारण न बनने के विषय में क्या विचार है? परमेश्वर द्वारा स्त्रियों को सुहावने वस्त्रों के विषय में दी गई आज्ञा के विषय में क्या विचारते हैं(1 तीमुथियुस 2:9)?
क्या आप ग़ौर करते हैं कि परमेश्वर ने सादगी से रहने की आज्ञा पुरुषों को नहीं दी क्योंकि वह जानता है कि ये पुरुष हैं जिनकी प्रवृति निहारने की होती है और स्त्रियाँ अशालीन पहनावे के द्वारा पुरुषों को आकर्षित करने में अधिक प्रवीण हैं। वो ही है जिसने पुरुष को स्त्री के शरीर की ओर आकर्षित होने के लिए बनाया है और उसने ऐसा एक उचित प्रयोजन हेतु किया है - उन्हें विवाह के संबंध में जोड़ने के लिए, फलवंत होने व वृद्धि करने के लिए।

नहीं, महिलाओं को अपने आपको ढक कर रखने व सादगीपूर्ण रहने के लिए कहना उन्हें शर्मसार करना नहीं है। ऐसी आज्ञा परमेश्वर हमें देता है। कब से परमेश्वर की आज्ञाएं स्त्रियों को शर्मसार करने लग गई हैं?
मुझे हमेशा महिलाओं को शर्मसार करने के विषय में दोषी ठहराया जाता है क्योंकि मैं उन्हें सिखाती हूँ कि वे घर को संभालने वाली बनें, पतिव्रता व विवाह से पहले कुंवारी रहें और यह कि उन्हें न पुरुषों को सिखानेवाली और न कलीसिया में अगुवाई करने वाली, शालीनता से पहनने व कार्य करने वाली बनना चाहिए। सच्ची मसीही स्त्रियों को, परमेश्वर के वचन में उनके लिए दी गईं आज्ञाओं से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। यदि वे होती हैं, तो उन्हें अपने हृदय की जांच करनी चाहिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे विश्वास में हैं।

इस लघु माध्यमिक विद्यालय के अधिकारियों को प्रत्येक अधिकार है कि वे लड़कियों को लैगिंग्स/चुस्त पैंट के ऊपर लंबी कमीज़ पहनने के लिए कहें ताकि वे लड़कों का ध्यान अपनी ओर न खींचे। लड़कों व पुरुषों को किसी भी निर्लज्ज/अशालीन वस्त्रों से अलंकृत महिला को देखे बिना विद्यालय और कलीसिया जाना चाहिए। नहीं, पुरुषों को लालसा नहीं करनी चाहिए और आपको अपने लड़कों को यह सीख देनी चाहिए कि वे ऐसी महिलाओं से एकदम अपनी नजरें हटा लें क्योंकि वे हमेशा ही महिलाओं को निर्लज्ज/अशालीन वस्त्रों में पाएंगे, परंतु हमें अपनी बेटियों को परमेश्वर की आज्ञाकारिता में सादगीपूर्ण वस्त्रों से सुशोभित रहने और किसी भाई के ठोकर खाने का कारण न बनने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। इनमें से कुछ भी लड़कियों व महिलाओं को शर्मिंदा करने वाला नहीं है। यह तो सत्य है।

भला तो यह है, कि तू न मांस खाए, और न दाख रस पीए, न और कुछ ऐसा करे, जिस से तेरा भाई ठोकर खाए।
रोमियो 14:21
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श्रेय: TheTransformedWife
Translation: Shivani K

नीतिवचन 31 में वर्णित स्त्री के 10 गुण

वह वफादार है और यीशु से पूरे दिल से प्यार करती है।
#1 यह एक स्त्री का विश्वास और मसीह के साथ संबंध है जो उसे एक गुणवान स्त्री बनाता है। नीतिवचन 31 में वर्णित स्त्री बनना विश्वास के बिना संभव नहीं है। हमें बताया गया है कि उसे प्रभु का भय है और उसकी प्रशंसा की जाएगी।
नीतिवचन 31:26, नीतिवचन 31:29 - 31, मत्ती 22:37, यूहन्ना 14:15, भजन 119:15

वह एक वफादार दुल्हन है।
#2 एक गुणवान स्त्री एक वफादार पत्नी है। लेकिन यह मत सोचिए कि यदि आप अविवाहित हैं तो आप एक नीतिवचन 31 की स्त्री नहीं हो सकती! आप बिल्कुल बन सकती हो! वास्तव में, एक ईसाई के रूप में, आप मसीह की दुल्हन हैं। आपको सब से पहले और सबसे महत्वपूर्ण उसके प्रति वफादार रहने के लिए बुलाया गया है।
 नीतिवचन 31:11-12, नीतिवचन 31:23, नीतिवचन 31:28, 1 पतरस 3, इफिसियों 5, उत्पत्ति 2:18

वह एक प्यार करने वाली माँ है और उसके बच्चे उसे धन्य कहते हैं।
# 3 नीतिवचन 31 की स्त्री एक अच्छी माँ है। हमें बताया गया है कि नीतिवचन 31 में वर्णित स्त्री के बच्चे उठते हैं और उसे धन्य कहते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यदि आप बच्चे नहीं हैं तो आप एक गुणवान स्त्री नहीं हो सकती हैं!
नीतिवचन 31:28, नीतिवचन 31:26, नीतिवचन 22:6, व्यवस्थाविवरण 6, लूका18:16

वह अपने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का ध्यान रखती है।
#4 ईसाइयों के रूप में हमें अपने शरीर की देखभाल करने का निर्देश दिया जाता है। 1 कुरिन्थियों 6:20 कहता है, "... अपने शरीर के साथ परमेश्वर की महिमा करो।" इसका वास्तव में मतलब है कि हम उन चीजों से दूर रहने की पूरी कोशिश करते हैं जो हमारे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
नीतिवचन 31:14-15, नीतिवचन 31:17, 1 कुरिन्थियों 6:19, उत्पत्ति 1:29, दानिएल 1, लैव्यव्यवस्था 11

वह दूसरों के साथ प्यार और दया से आचरण करती है।
#5 एक गुणी स्त्री दूसरों की प्रसन्न भाव से सेवा करती है। वह दूसरों की ओर एक इच्छुक सहायक और विचारशील है। वह अपनी प्राथमिकताओं को बनाए रखते हुए अपने आसपास के लोगों की मदद करने के लिए पहुंचती है। वह दानशील है।
नीतिवचन 31:12, नीतिवचन 31:15, नीतिवचन 31:20, 1 कुरिन्थियों 13:13

परमेश्वर ने उसे जो उपहार दिए हैं, उनका वह बुद्धिमानी से व्यवस्थापन करती  है।
#6 हमें बताया गया है कि नीतिवचन 31 की स्त्री अपने वित्त से सावधान रहती है और बुद्धिमानी से पैसा खर्च करती है। नीतिवचन 31 के अंश में हमें यह भी बताया गया है कि वह अपने स्वयं के व्यवसाय के साथ आय प्रदान करने में मदद करती है। वह होशियार और आर्थिक रूप से समझदार थी।
नीतिवचन 31: 14, नीतिवचन 31: 16, नीतिवचन 31: 18, 1 तीमुथियुस 6: 10, इफिसियों 5: 23, व्यवस्थाविवरण 14: 22, गिनती 18: 26।

वह मेहनती है और तत्पर हाथों से काम करती है।
#7 एक गुणवान स्त्री स्वेच्छा से काम करती है। वह आलस्य की रोटी नहीं खाती है - इसके बजाय वह प्रत्येक दिन अपने जीवन के लिए परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने में व्यस्त रहती है। वह आलसी नहीं है, वह हाथ में लिए हुए काम को अप्रसन्नता से नहीं करती है, और वह अपने घर के तौर-तरीकों को अच्छी तरह देखती है।
नीतिवचन 31: 13, नीतिवचन 31: 16, नीतिवचन 31: 24, नीतिवचन 31: 31, फिलिप्पियों 2: 14

वह अपने घर की एक अच्छी प्रबंधक है।
#8 नीतिवचन 31 की स्त्री अपने घर के तौर-तरीकों को अच्छी तरह देखती है। इसका मतलब यह नहीं कि उसने हर काम खुद किया! वह अपने परिवार और मेहमानों के लिए आनन्द और प्यार का आमंत्रित माहौल बनाती है। वह अपने आसपास के लोगों का आतिथ्य आदर से करती है।
नीतिवचन 31: 15, नीतिवचन 31:20-22, नीतिवचन 31:27, तीतुस 2:5, 1 पतरस 4:9, इब्रानियों 13:2

वह अपना समय अच्छे कामों/चीजों में व्यतीत करती है।
# 9 गुणी स्त्री अपना समय वही व्यतीत करती है जो करने की आवश्यकता है। वह कार्यरत और मेहनती है। वह उन चीजों पर रहने में समय नहीं बिताती है जो प्रभु को खुश नहीं करती हैं।
नीतिवचन 31:13, नीतिवचन 31:19, नीतिवचन 31:27, सभोपदेशक 3, नीतिवचन 16:9,
फिलिप्पियों 4:8

वह रचनात्मक है और सुंदरता और धार्मिकता को पसंद करती है।
#10 एक गुणी स्त्री मूल्य और सुंदरता की स्त्री है। उसके पास आंतरिक सुंदरता है जो केवल मसीह से आती है। वह अपने जीवन और अपने प्रियजनों के जीवन में सुंदरता बनाने के लिए अपनी रचनात्मकता और भावना की शैली का उपयोग करती है।
नीतिवचन 31:10 नीतिवचन 31: 21 - 22, नीतिवचन 31: 24 -25, यशायाह 61:10, 1 तीमुथियुस 2: 9, 1 पतरस 3: 1 - 6
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Original Article - AVIRTUOUSWOMAN.ORG
Translation - by Glory Apologetics



कई बहनें हमसे पूछती हैं कि क्या वे मासिक पीरियड्स/माहवारी के दौरान प्रार्थना कर सकती हैं या  चर्च की गतिविधियों में भाग ले सकती हैं। क्या ऐसा कोई धार्मिक प्रतिबंध है? इस संक्षिप्त वीडियो में, हम यह समझाने की कोशिश करते हैं कि क्या महिलाओं को प्रार्थना करने, बाइबल पढ़ने या चर्च जाने की अनुमति है!

कृपया इसको साझा करें क्योंकि कई क्रिस्चियन महिलाएं इस सवाल से जूझ रही हैं और पूछने से शरमा रही हैं। यह किसी की मदद कर सकता है!

        क्या विश्वासी महिलाएं माहवारी के द्वारान
1.कलीसिया जा सकती है?
2.कलीसिया में प्रभु भोज ले सकती है?
3.बाइबल अध्ययन कर सकती है?
4.प्रार्थना कर सकती है?
5.परमेश्वर जुड़े हुए अन्य कोई भी काम कर सकती है?
6. क्या महिलाएं पिरिड्स के द्वारान प्रभु भोज ले सकती हूँ?

आज समाज के अन्य धर्म के लोग माहवारी को किस नजरिये से देखते है उन्हें घर में कोई भी काम नही करने  देते उनके लिए सारी चीजें अलग रखी जाती अगर महिलाएं माहवारी के द्वारान अनजाने में छू भी लेती है  तो उस चीज को अशुद्ध माना जाता है 

तो क्या बाइबल माहवारी के समय विश्वासी महिलओं को हर एक चीज से दूर रहने के लिए कहती है ?
जवाब : बिल्कुल नही 

जब महिलाये को हर महीने पीरियड्स आती है तो पवित्र आत्मा दूर हो गए या यीशु मसीह हमारे शरीर से निकल गए क्या महिलओं को ये समझना चाहिए है ?

सब से पहले हमें समझना है कि हमारा विश्वास अन्य धर्मो की तरह सिमित नही है 

जब हम यीशु मसीह को अपना उधारकर्ता स्वीकार कर लेते है तो उसी वक्त हमारा शरीर परमेश्वर का पवित्र मन्दिर बन जाता है और पवित्र आत्मा हमारे अन्तर्निवास में बसा है उसे महिलाये माहवारी के समय कभी भी नही खो सकती है

 महिलाये माहवारी के समय कलीसिया, बाइबल अध्ययन, प्रार्थना और महिलओं के बीच प्रचार और  परमेश्वर से जुड़े अन्य काम कर सकती है ।इसमें कोई भी पाबन्दी नही है ।

कुछ महिलाएं पूछते है कि माहवारी के समय उपवास प्रार्थना कर सकती है ?
जवाब : हाँ कर सकती है 

लेकिन पीरियड्स के समय शरीर कमजोर हो जाता है और तो उस वक्त डॉक्टर की सलाह ले तो आपके सुरक्षा के लिए बेहतर होगा 

2.कुछ महिलाये माहवारी के समय अपना गुस्सा दुसरो पर उतारती है या भड़क जाती है लेकिन उस समय महिलायों को आत्मिक रीति से मजबूत रहना चाहिए है और अपने आप को आत्मसंयम रखे। और सारी चीजों को नियंत्रित करने के लिए हमे पवित्र आत्मा दिया है और माहवारी के समय अपने आप को कोषीय मत और कहीं अकेला जाना पसंद करते है तो अकेले रहे। और उस समय वचन पढ़े और प्रार्थना करें

हम सब इस संसार के कर्ज और हवा आदम के पाप के भागीदार है और परमेश्वर का वचन कहता है कि दर्द से बच्चें जनने का जो प्रतिक्रिया है जब एक लड़की में उस चीज की क्षमता आ जाती है तब उस दर्द को सहती है लेकिन अन्त के दिनों में (भविष्य में) ये सारी चीजें दूर हो जाएगी ।

माहवारी के समय जब ज्यादा दर्द होता है तो उस समय डॉक्टर की सलाह ले और मेडिकल से दवाइयों ले क्योंकि जो मनुष्य से अशम्भव है वो परमेश्वर से अशम्भव नही है इसलिए परमेश्वर ने हमें जो सारी चीजों की उपलब्धित  दिए है उस का उपयोग करे और प्रार्थना करे प्रभु उस समय उस दर्द को कम करने के लिए सहायता करेंगे ।

हमारा खुदा हमारे भवन में रहता है और हमारा शरीर परमेश्वर का पवित्र मन्दिर है तो बे फिकर परमेश्वर की महिमा करे।

क्या महिलाएं पिरिड्स के द्वारान प्रभु भोज ले सकती हूँ?
क्या लैव्यव्यवस्था 15:19-24 महिलाओं को प्रभु भोज में भाग लेने से रोकता है?

जवाब : हाँ ले सकती है भौतिक रूप से प्रभु भोज लेने की कोई दिक्कत नहीं है अगर अनुचित रीति से ले रही हैं ,तो वो हमें अनवार्थी बना सकती है
 
कुछ लोगों ने लैव्यव्यवस्था 15 : 19 को संकेत कर रहे है कि इस वचन के अनुसार महिलाएं अपवित्र  है और माहवारी के समय कलीसिया नही जा सकती आदि। और क्या उन्हें इस वजह से रोका जाना सही है ?

बाइबल में कही पर ऐसा नही लिखा है की महिलाये माहवारी के समय अपवित्र बन सकती है लैव्यव्यवस्था में 15:19 अशुद्ध के बारें में कहा गया न कि अपवित्र के बारें में कहा गया हैं लेकिन कुछ लोगों ने इस वचन को गलत संकेत किया है और गलतफहमी में डूब गए हैं।

वास्तिवक में इस वचन का सही संदर्भ क्या है और किसके लिए कहा गया है ?

लैव्यव्यवस्था 15 : 1-30 में चार प्रकार के शरीर की स्त्राव के बारें में कहा गया है सिर्फ महिलायों के लिए नही बल्कि पुरुषों के लिए भी कहा गया है अपवित्र के बारें में नही बल्कि अशुद्ध के बारें में कहा गया जो कि कुछ चीजें अशुद्ध बना सकती है 

लैव्यव्यवस्था 15 :1-30 चार प्रकार के शरीर की स्त्राव के बारें में कहा गया जो आप वचन पढ़ सकते है 👇👇
1.लैव्यव्यवस्था 15:2-15 पुरषों के बारें में 
2.लैव्यव्यवस्था 15:16-18 पुरुषों के स्वभाविक रूप के बारें में
3.लैव्यव्यवस्था 15:19-24 स्त्री के स्वभाविक रूप के बारें में 
4.लैव्यव्यवस्था 15:25-30 स्त्री के बारें में 

ये सिर्फ इस्राइल के प्रजा के लिए लिखा गया था अगर पुराने नियम को ध्यान से पढ़ते है तो परमेश्वर के भवन में सिर्फ महायाजको को जाने की अनुमति थी और वो  महायाजक कौन थे लेवी के गोत्र के थे साल में एक बार में सिर्फ लेवियों के घराने से महायाजकों को परमेश्वर के भवन में जाने के अनुमति दी जाती थी 

रोमियों 6:14 वचन कहता है कि हम व्यवस्था के अधीन नहीं वरण अनुग्रह के अधीन हो।

इब्रानियों 10:1 क्योंकि व्यवस्था, जिसमें आनेवाली अच्छी वस्तुओं का प्रतिबिम्ब है पर उनका असली स्वरूप नहीं, इसलिए उन एक ही प्रकार के बलिदानों के द्वारा जो प्रतिवर्ष अचूक चढ़ाए जाते हैं, पास आनेवालों को कदापि सिद्ध नही कर सकती।

जब प्रभु भोज लेने की बात करते है तो प्रभु भोज क्या है ?
एक कलीसिया एक शरीर है हम एक दूसरे को बड़ा छोटा नहीं देखते हम यीशु मसीह के भाग में एक अंग है अगर तुम कहोंगें की महिलाएं माहवारी के द्वारान प्रभु भोज नही ले सकती और तुम अशुद्ध हो तो वचन को किस प्रकार गलत संकेत कर रहे है और वापस से उस व्यवस्था को जिंदा कर रहे है 

इब्रानियों 10:19,20 
इसलिए हे भाइयो, जब हमें यीशु के लहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है, जो उसने परदे अर्थात् अपने शरीर में से होकर, हमारे लिए अभिषेक किया है 

हम उस नियम से बाहर आ गए है और मसीह के परिपूर्णता के उस लहू के उद्धार में आ गए है हमें उस पवित्र स्थान में जाने की अनुमति दी गई है तो उस समय ऐसा परिस्थिति था कि अशुद्ध होकर किसी चीज को छू नही सकते थे लेकिन इब्रानियों 10:19,20 वचन के  अनुसार वो पर्दा फट गया है 

तो क्या आज लैव्यव्यवस्था के व्यवस्था के अनुसार आज महिलायों को माहवारी के द्वारान प्रभु भोज लेने के लिए रोका जा सकता है ?

याकूब 2:10 क्योंकि जो कोई सारी व्यवस्था का पालन करता है परन्तु एक ही बात में चूक जाए तो वह सब बातों में दोषी ठहर चुका है 

तो बाइबल कहती है की अगर कोई भी पूराने नियम का पूरा नियम पालन करता है लेकिन एक भी नियम को तोड़ता है तो वह सारें नियम तोड़ने का दोषी बन जाता है

लेकिन आज क्या कह रहें है कुछ ईसाई जो विधि-सम्मत के अनुसार माहवारी के समय प्रभु भोज नही ले सकती? तो वो यह कह रहें है कि तुम पुराने नियम के सारे कानूनों को तोड़ दो और सिर्फ ये वाला नियम का पालन करो क्योंकि मुझे अच्छा लगता है कभी कभी ऐसे समय में समाज में पुरूष ईर्ष्या दिख जाता है

लेकिन बाइबल में यह रोग नए नियम में नही देती क्योंकि जिस प्रकार नए नियम में पुरुषों को उस पवित्र स्थान में प्रवेश कर चुका है मसीह के लहू के द्वारा (इब्रानियों 10:19,20) के अनुसार वैसे ही महिलाये भी उस पवित्र स्थान में प्रवेश कर चुकी है तो महिलाये माहवारी के समय में बे फिकर प्रभु भोज ले सकती है लेकिन प्रभु भोज अनुचित रीति से ले रही तो वो अलग कैटेगिरी है लेकिन माहवारी उसका सिमित नही है।

मरकुस 5:25-34 एक स्त्री के बारें में जो बाहर वर्ष से लहू बहने का रोग था।
पुराने नियम के लैव्यव्यवस्था के अनुसार यीशु मसीह भी उस समय वहाँ पर भी थे तो पुराने नियम का व्यवस्था उस वक्त भी लागू था वो महिला जो अशुद्ध थी जो पवित्र वस्तु को नही छू सकती थी लेकिन बात ये बनी मेरे प्रिय भाई बहनों की उस सच्चाई को यीशु मसीह ने कैसे बदला और यीशु मसीह ने उसे कुछ नहीं कहा

लेकिन पुराने नियम के लैव्यव्यवस्था के अनुसार उसने इस्त्राएल के पवित्र यीशु को छू लिया जो इस्राएल का अति पवित्र परमेश्वर है उस चीज को नहीं पर उस अति पवित्र परमेश्वर को छू लिया
क्या यीशु मसीह ने उसको डाँटा, चिल्लाया क्या यीशु मसीह ने यह कहाँ कि तुम पुराने नियम को तोड़ती हो तुमको दण्ड मिलेगा नहीं यीशु मसीह ने उस महिला को चंगाई दिया यही प्रमाण है इब्रानियों के किताब के अनुसार यीशु मसीह ने उस पवित्र स्थान का मार्ग खोल दिया है।


तो महिलाएं माहवारी के समय निश्चित रूप से प्रभु भोज ले सकती है और परमेश्वर से जुड़े हुए अन्य काम भी कर सकती है क्योंकि हमारा शरीर परमेश्वर का पवित्र मन्दिर है और पवित्र आत्मा हमारे भवन में रहते है ।


       -Video by Francis S
       - Tran-scripted by Sushma Gupta

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