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मरकुस 16:17-18 का अर्थ और ज़ाकिर नाइक को जवाब

 मरकुस 16:17-18 का अर्थ और ज़ाकिर नाइक को जवाब

जय मसीह की भाईयों और बहनों आप सभी को त्रिज्ञा परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह के नाम से एक बार फिर से मैं स्वागत करता हूँ! आज इस विडीयों के द्वारा हम एक  और सवाल को देखेंगे; जो हर बार जो बाइबल को नहीं मानते हैं और यीशु खुदा है, यह बात को नहीं मानते है वह हमारे सामने लेकर आते हैं। वह सवाल जो है बाइबल से निकालते हैं वह हम पढ़ सकते है मरकुस के किताब 16:17-18, "जो मुझ में विश्वास करेंगे; उनमें यह चिह्न होंगे। वह मेरे नाम से दुष्टात्माओं को बाहर निकाल सकेंगे। वे नई-नई भाषाएँ बोलेंगे, वे अपने हाथों से साँप पकड लेगें और यदि वे विष भी पी जाए तो उनको हानि नहीं होगी, वे रोगियों पर अपने हाथ रखेंगे और वे चंगे हो जाएंगे।"

दोस्तों, यह वचन को जो है कई बार हमारे मुसलमान दोस्त और जो यीशु के दैविक्ता के ऊपर भरोसा नहीं करते है। वह एक आजमाइश के तौर पर, एक चुनौती के तौर पर हमारे सामने पेश करते हैं। अब यह चुनौती देखिए डॉ.ज़ाकिर नाइक ने भी उनके एक डिबेट में, उनके एक मुनाजरे में उन्होंने सामने लेके आया था और मुश्किल की बात यह है, कि बहुत सारे मसीही भाई जो हैं; ऐसे सवाल का जवाब कैसे देना है? वह नहीं जानने के कारण उनको लगता है कि बाइबल गलत हैं। तो आप देखिए कि डॉ. ज़ाकिर नाइक ने किस प्रकार यह  सवाल को पुछा था, उस मुनाजरे में....।

डॉ.ज़ाकिर नाइक : बाइबल में एक (Scientific) अजमाइशे है, कैसे पता चलेगा? सच्चे मानने वाले का यह जिक्र है, मरकुस की इंजील में 16:17-18 वह कहता है, कि सच्चे मानने वालों की कुछ निशानियाँ होंगी उनमें से चन्द निशानियाँ यह होंगी। यदि मेरे नाम से वह शैतान को मार भगाएंगे, वह लोग गैर मुल्क की जुवाने बोलेंगी, नई जुबानी वह अजहे काबू करेगें। अगर वह मरने वाला ज़हर भी पियेंगे। तो वह मरेंगे नहीं, अगर वह अपना हाथ बिमारों पर रखेंगे तो वह ठीक हो जाएंगे यह एक वैज्ञानिक आजमाइश है, वैज्ञानिक इस तरह में इसे किसी सच्चे और मोमिन ईसाई के परख के लिए तदिप अजमाइश कहा जाता है। मेरी जिंदगी के पिछले दस सालों में हजारों ईसाईयों के साथ मैं उठता बैठता हूँ। मेरे साथ ही तालुकात है वह मुझे अभी तक याद है। एक भी ऐसा ईसाई नहीं मिला, जो कि बाइबल कि इस तदिप करने वाली इस अजमाइश पर पुरा उतरता हो और मुझे अभी तक ऐसा एक भी इसाई नहीं मिला जिसने ज़हर पीया हो, एक भी इसाई ऐसा नहीं वह ज़हर पीये और वह मरे नहीं....।

दोस्तों! केवल डा.ज़ाकिर नाइक ही नहीं, आज बहुत सारे हमारे मुसलमान दोस्त हैं वह यही चेलेंज को  आजमाइश को लेकर हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि यदि तुम सच्चे क्रिश्चियन हो तो तुम जेहर पीकर दिखाओ, तुम यह सारे कामों को करके दिखाओ क्योंकि यीशु ने तुमको बोला है न कि तुम यह सारे चीजें कर सकते हो।

दोस्तों दुख की बात यह कि आज बहुत सारे ऐसे अशिक्षित यानी कि बाइबल को नहीं समझने वाले  क्रिश्चियन है। यह चीजों को जो हैं वाकई में आजमा के देखते हैं और उनकी मौत भी हो जाती है। तो एक मुसलमान भाई ने जो हैं हमारे फेसबुक पेज पर एक लिंक पोस्ट किया था उसमें कोई पास्टर ने जो है अपने सभा के लोगों को जेहर पिलाया, विष पिलाया और वे लोग मर गए।

जी हाँ, दोस्तों! इतिहास में ऐसे बहुत सारे घटनाएं हुए हैं। जहाँ पर यह वचन को जो है, सचमुच बहुत सारे क्रिश्चयनस् लेकर आजमाने की कोशिश करने लगे। जैसे कि साँप को उठाना, एक पास्टर के नजरिए से शायद उन्होंने साँप को रखकर आराधना चलाया, साँप को दिखाकर बताया कि देखो मैं सच्चा विश्वासी हूँ, लेकिन एक दिन उस साँप ने उनको काट लिया और उनकी मौत हो गई।

तो दोस्तों यह वचन हमको कहना क्या चाहती हैं? बाइबल को उसके सुन्दरता में और उसके सन्दर्भ में नहीं पढ़ने के कारण हम ऐसे गलत आजमाइशों को लाकर उलझन पैदा कर सकते हैं; और लोगों को भी भरमा सकते हैं और यही तरीका डॉक्टर ज़ाकिर नाइक और बहुत सारे दावा प्रचारक जो है, वह इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह जब मैं लगभग 17-18 साल का था तो लोकल ट्रेन पर मैं सुसामाचार बाँट रहा था, ट्रेक्स बाँट रहा था तो अचानक से एक व्यक्ति ने भीड़ में सबके सामने मुझे बुलाया कि यहाँ आओ। तो मैं भी उनके पास गया सोच कर कि कुछ पुछेंगे यीशु मसीह के बारे में तो उन्होंने तुरन्त पुछा कि तुम्हारे पास बाइबल है क्या? तो मैं ने बोला हाँ मेरे पास बाइबल है तो बोला कि निकालो मरकुस 16:17-18 और उन्होंने सबके, सब लोग खड़े थे वहाँ पर भीड़ जमी हुई थी। ट्रेन के अन्दर चलती हुई ट्रेन के अन्दर उन्होंने बोला कि पढ़ो और मैंने वह वचन पढ़ा। पढ़ने के बाद उन्होंने पुछा कि क्या तुम इस बात पर भरोसा करते हो? अब उस समय में मुझे नहीं पता था कि यह वचन का अर्थ क्या है?, इस वचन को किस तरीक़े से समझना चाहिए। तो एक 17-18 साल का लड़का मैं क्या करता मैं प्रभु के जोश में कि मैंने बोला कि हाँ इस बात पर विश्वास करता हूँ। तो उसने सबके सामने मुझे चुनौती दिया, कि तुम सच्चाई से इस बात को मानते हो। तुम इसे पीकर दिखाओ, अब उस समय मुझे पता नहीं चला मुझे क्या करना चाहिए? यदि आज वह भाई साहब मिलते तो शायद से मैं उनको अच्छे से बाइबल के वचनों के आधार पर समझा सकता था कि इसका मतलब क्या है? खैर!, ऐसा चुनौती देने के बाद मेरे पास तो एक ही मौका बचा था, मैंने बोला ठीक है! मैं पिऊँगा लेकिन ऐसा हुआ कि वह भाई साहब बहुत विवस कर रहे हैं थे, कि तुम नहीं पी सकते हो। मैं विवश कर रहा हूँ कि मैं पी सकता हूँ। तो एक स्टेशन आया जैसे ही उनके साथ में उतरने की कोशिश किया, चलो अंकल मुझे जेहर पीलाओं मैं पी कर दिखाऊँगा यीशु के नाम से और सभी लोग देख रहें थे ट्रेन में और मैं बोल रहा था यीशु के नाम से मैं पिऊँगा। तो वह मेरे जोश के देख कर थोड़ा सा सोच में पड़ गए कि यह लड़का पागल तो नहीं हो गया; तो तुरन्त उसने मुझे ट्रेन के अन्दर धक्का देकर, नीचें उतर कर चलें गए।

तो दोस्तों मेरा कहने का मतलब यह है कि आज आप कहीं पर भी जाएंगे यीशु मसीह के बारे में बोलने के लिए, कुछ लोगों को प्रशिक्षण दी होती हैं कि भाई यह वचन को निकाल कर क्रिश्चयन को वार करो और उनको सवाल पुछो और उनको जाँचों कि उनको बाइबल आता है या नहीं आता है, अगर आता भी है तो उनका बाइबल गलत है।

तो दोस्तों मैं सीधा जवाब में आना चाहूँगा कि मरकुस 16:17-18 में हमें क्या सीख मिलता है? वह वाकई में वचन कहती क्या है? यह जवाब को है जो मैं दो भाग में रखना चाहूँगा। पहिला: एक मैं आपको सवाल का सीधा जवाब पेश करुँगा बाइबल से और उसका अर्थ समझाऊँगा। दुसरा: जो तरीक़े से मुसलमान दोस्त हमारे पास यह सवाल को लेकर आये हैं। मैं भी वही तरीका इस्तेमाल करुँगा, यह विडीयों में एक चुनौती उनको भी दूँगा। एक आजमाइश उनके लिए भी है और मेरे दूसरे वाले विडीयों में इसके बाद जो अपलोड करुँगा वह वाले विडीयों में उन्हीं के किताब से और ऐसे ही बहुत सारे चुनौती मैं उनके सामने रखूँगा। देखेंगे! कि क्या वह उस चुनौती को स्वीकार करते हैं या फिर वह उनके किताब को वह गलत मानते हैं। तो यह रहा मेरा जवाब…

दोस्तों, जब भी हम वचन को पढ़ते हैं हमें जानने की जरुरत है कि जब यीशु मसीह अपने चेलो को देख कर कह रहे थे कि तुम जाकर सुसामाचार सुनाओ। तो वह अपने चेलों को यह आज्ञा दे रहे थे कि तुम ऐसे-ऐसे जगहों में जाओगे; तुम्हें पता नहीं होगा कि क्या खाने के लिए मिलेगा, क्या पहनने के लिए मिलेगा, वहाँ पर परिस्थिति कैसी होगी? तो यीशु मसीह जो हैं वहाँ पर उनको एक वादा कर रहे हैं, पवित्र आत्मा का एक तौफा दे रहे हैं, गिफ्ट दे रहे हैं। यीशु मसीह यह नहीं कह रहे हैं कि तुम जाओ, जाकर जहाँ-जहाँ साँप मिलेगा उसे उठा लो जहाँ-जहाँ जेहर मिलेगा उसे पीलो और जाकर जादु का खेल या फिर जादु वाला कोई मनोरंजन कार्यक्रम करों। "यीशु ने यह नहीं कहा, यीशु उनको  वादा कर रहे हैं कि जब तुम सुसामाचार सुनाने जाओगे इस दुनिया में सच्चे विश्वासी के रुप में तो अनजाने में तुम्हारे विरोध कुछ गलत काम आ जायेगी; तो उस गलत चीजों में परमेश्वर का हाथ तुम्हारे साथ रहेगा और वह तुम्हें बचायेगा।"

तो दोस्तों यह एक आजमाइश नहीं है, बल्कि यह परमेश्वर का वादा है उनके सच्चे लोगों के लिए। यह जो मरकुस 16:17-18 वा वचन में हम देखते है ठीक उसी प्रकार का एक वादा हम पुराने नियम में भी देख सकते है। भजन संहिता 91:13 में देख सकते है, जहाँ पर लिखा है कि तुम बिच्छुओं को रोंदोगे, तुम ताकतवर शेरों के ऊपर चलोगे यह वचन लिखा है।

तो दोस्तों पुराने नियम में जरा पढ़कर देखिए, क्या कोई भी नबी, कोई भी भविष्यद्वक्ता यह वचन को लेकर भजन संहिता 91:13 वा वचन को लेकर जंगलों में जाकर साँपो को पकड़ना, बिच्छुओं को पकड़ना बिच्छुओं को पकड़कर निचोड़ना और शेरो के साथ खेलना। ऐसा किया उन्होंने? क्या उन्होंने परमेश्वर के वादा को निकाल कर परमेश्वर को ही उन्होंने आजमाइश मेंडाला? परमेश्वर को ही उन्होंने कसौटी में डाला? 'नहीं!' लेकिन शैतान जब यीशु मसीह से बात करने के लिए आया था जब यीशु मसीह चालीस दिन के उपवास में, उस जंगल में थे शैतान उनके पास आया और वही शैतान वही तकनीक यीशु मसीह के पास इस्तेमाल करके कहा, कि यदि तुम खुदा हो तो इस पत्थर को रोटी बना कर खालों, क्या करो? तुम ऊपर से कुद जाओ क्योंकि वचन में तो लिखा है। लेकिन यीशु मसीह ने क्या जवाब दिया? यीशु मसीह ने कड़ाड़ा जवाब दिया उस शैतान को लुका के किताब 4:12 वा वचन में हम पढ़ते हैं कि तुम्हारे खुदा की परीक्षा न लो।

हाँ दोस्तों, यह हम पुराने नियम में भी पड़ते हैं, नये नियम में भी पड़ते हैं खुदा की परीक्षा नहीं लेना चाहिए हमें खुदा की आजमाइश नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि खुदा जब वादा करता है वह सही समय में पुरा करता है। तो क्या यह वादा पूरा हुआ? जी हाँ! हम दानिय्येल  कि जिंदगी में देख सकते है। दानिय्येल की किताब में 6 अध्याय में देखते हैं कि जब दानिय्येल को शेरों के गुफा में डाल दिया गया तो कोई भी शेर ने उनको हानि नहीं पहूँचाया। तो क्या दानिय्येल उसके पहले भजन संहिता 91:13 के अनुसार जंगलों में जाकर जबरदस्ती शेरों को ढूँढ ढूँढ कर उनके साथ लड़ाई करने गए कि देखों हाँ खुदा ने कह दिया है तो वह मुझे कुछ होने नहीं देगा। “नहीं” ऐसे अचानक से आने वाले परिस्थिति में, माहौल में प्रभु यीशु जो हैं अपने बच्चों को सम्भालते हैं, बचाते हैं वह है पवित्र आत्मा का वादा और नये नियम में भी क्या मरकुस 16:17-18 वा वचन का पुर्ती हम देखते हैं। जी बिल्कुल देखते हैं! आप देखिए प्रेरितो की किताब 2 अध्याय पढ़ कर देखिए, "लोग भिन्न-भिन्न भाषा में बोलते हैं आज भी कितने सच्ची मसीह लोग हैं वह भिन्न-भिन्न भाषा, अन्य भाषा में बोलते हैं। तो यह परिपूर्णता है उस वादा का।"

दुसरा आप प्रेरितों की किताब 5 अध्याय पढ़ के देखिये, "वहाँ पर भारी मात्रा में यीशु के चेलो ने जो है चमत्कार के काम किए और बड़े बड़े काम किए।" जैसे मरकुस 16:17-18 वचन में लिखा है। "मरे हुओं को जिलाना और जो लंगडे है, लूले है, लाचार हैं, बिमार हैं उनको चंगा करना और उससे भी बढ़ कर 19 अध्याय में आप देख सकते हो; कि पौलुस कितना करते हैं, पौलुस का गमछा गिरने पर कपडा गिरने पर लोग चंगे हो रहे हैं। तो "यह परिपुर्णता है" दोस्तों और उसी प्रकार अगर आप प्रेरितों के काम में 28 वा अध्याय में पढ़ेंगे, जब एक बार पौलुस जो है लकड़ी को जमा कर रहे थे तो अचानक से लकड़े के जलने के गर्मी से जो है वह साँप बाहर निकल आया और उनके हाथ में लिपट लिया। तो लोगों ने कहा कि यह खुनी है तो इसके वजह से इसके हाथ में वह साँप लिपट लिया है, करके लेकिन वहाँ पर क्या हुआ? पौलुस ने उसको झटक दिया। तो इसका मतलब यह नहीं कि हाँ, मरकुस 16:17-18 में लिख दिया करके कि 'मैं जंगल में जाऊँगा और जहाँ-जहाँ साँप मिले मैं अपने हाथ में लिपट लूँगा और दुसरो को मैं जादु का खेल दिखाऊँगा, देखों मुझे कुछ हुआ नहीं मैं सच्चा  विश्वासी हूँ।

तो दोस्तों यह सही समय पर जो है, यह वादा जो है पुरा होता है। यही चीज हम देखते हैं; "आजमाइश नहीं है" तो जितने भी लोग यह सवाल को लेकर आते हैं उनको हम एक चीज कहेंगे, "खुदा को आजमाना नहीं।" लेकिन अगर सच्चे विश्वासी के तौर पर कोई ऐसे स्थिति में परिस्थिति में अनजाने में कोई जहरीला वस्तु भी खा लेंगे या फिर साँप का सामना करना पडे़। प्रभु यीशु मसीह अपने पवित्र आत्मा के वादा के अनुसार जरूर सम्भालेंगे। तो दोस्तों "यह वादा है", यह आजमाइश नहीं। लेकिन जब हम आजमाइश के बारे में बात करते हैं, तो हमें हदीस के तरफ चलना चाहिए, क्योंकि हदीस में जब मैं पढ़ रहा था तो एक हदीस है शरीफ अल बुखारी का 7 किताब 65 हदिस न. 356 बुखारी  7:65/356 

दोस्तों यह हदिस में लिखा है अगर कोई व्यक्ति सुबह सात अजवे यानी कि साथ खजुर बीज को खाता है। तो वह दिन उसके ऊपर कोई भी चीज हावी नहीं हो सकती हैं, ज़हर भी नहीं।

दोस्तों, (मरकुस 16:17-18) तो परमेश्वर का वादा है, उसका जवाब मैंने आपको समझा दिया कि परमेश्वर की आजमाइश नहीं करनी है। खुदा को परीक्षा को में नहीं डालना है; लेकिन यहाँ पर मोहम्मद साहब ने एक दवाई बताया है। दवाई को क्या करना चाहिए? स्वाद करना चाहिए तो अगर हमसे कोई आकर चुनौती करता है कि तुम ज़हर पीकर दिखाओं। सच्चे क्रिश्चयन हो या नहीं, तो मैं आप को खुली चुनौती देना चाहूँगा। आप सुबह के समय में सात खजुर या सात अजवे खा लिजिए और उसके बाद ज़हर को पी लिजिए। अगर आप नहीं मरेंगे तो मैं मान जाऊँगा कि आप सच्चे मुसलमान हैं।

दोस्तों, बस इतना ही नहीं हदीस में और भी बहुत सारे दवाइयाँ हैं जो मोहम्मद साहब ने बताई हैं, जिसे हमें जाँच करना चाहिए। अगर वह सच नहीं है वह झूठ है तो आप को सोच लेना चाहिए; कि क्या वाकई में यह खुदा से आने वाली चीजें हैं या फिर मन में आने वाली बातें हैं। तो मेरे अगले विडीयों में जो है मैं आपको ऐसी हदीस में से कुछ ऐसे दवाइयों को दिखाना चाहूँगा मैं चुनौती देना चाहूँगा उन लोगों को जो हमें चुनौती करते हैं, कि विष पीओ; उन लोगों को चुनौती करना चाहूँगा कि तुम अगर सच्चे मुसलमान हो तो यह करके दिखाओं।

आखिर में एक छोटा सा उदाहरण देकर, मैं आप को  बताना चाहूँगा कि यह वचन का सुन्दरता क्या है?

दोस्तों, अगर आप एक लेपटॉप खरीदते हैं या फिर कोई एक इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट खरीदते हैं तो उसमें समझिये आपको दो साल की ऑरान्टी आती हैं। वहाँ पर कम्पनी वाले कहते हैं, कि अगर उसमें कुछ बिगड़ गया तो हम वह दो साल की या एक साल की ऑरान्टी में कवर देगें। लेकिन ऑरान्टी यह जो है वादा हैं वह कम्पनी का लेकिन ऑरान्टी को पाकर अगर आप उस मोबाइल को खोल कर उसके पार्टस वगैरा निकाल कर उसमें सॉफ्टवेयर की कोडिंग वगैरा कर कर अगर आप उसको बिगाड़ते है और फिर उस कम्पनी वाले के पास लेकर जायेंगे है तो वह क्या कहेगा? वह बोलेगा कि मैंने आपको ऑरान्टी दिया था; वादा किया था अगर अपने आप से वह खराब होगा, तो मैं सम्भालूँगा। तो अगर आपको कोई कहता है कि यदि तुम गिर जाओगे तुम्हारे गिरने के समय में आकर तुमको पकडूँगा। लेकिन मैं जानबुझ कर बिगाड़कर या फिर जान बुझकर नीचें गिराकर तौड़कर मैं आशा करुँगा कि सामनेवाला उसका जिम्मेदारी लें।

तो इसे हम क्या कहेंगे? दोस्तों, मैं कहूँगा कि आप बाइबल को अपने सुन्दरता और अपने सन्दर्भ में समझिए। "मरकुस 16:17-18 वा वचन मुझ जैसे और सच्चे क्रिश्चयन भाईयों के लिए एक वादा है; हर स्थिति में पवित्र आत्मा का हाथ हमारे साथ रहेगा। चाहें कुछ भी हो जाए, आन्धी आए, तुफान आए या फिर ऐसे विष भरें कार्य हमारे जीवन में आए, पवित्र आत्मा हमारा साथ देगा। कभी नहीं छोड़ेगा।"

आप भी प्रभु यीशु पर विश्वास कीजिए और अगले विडीयों में मैं कुछ चुनौती उठाऊँगा। हदीस में से, देखिए और अपने आपको सिखाइये और दूसरों को भी सिखाइये।

प्रभु आपको आशीष करें!

Transcription by Nini Pandit

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ਕੀ ਸਿਰਫ਼ ਸਦੀਵੀ ਧਰਮ ਹੀ ਸੱਚ ਹੈ ?

ਕੀ ਸਿਰਫ਼ ਸਦੀਵੀ ਧਰਮ ਹੀ ਸੱਚ ਹੈ ? ( Is Only Sanatana Dharma True?  Part 1)

 ਹਿੰਦੂਤਵ ਆਪਣੇ ਆਪ ਵਿੱਚ ਦਾਵਾ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਕਿ ਉਹ ਸਦੀਵੀ ਧਰਮ ਹੈ ਜਾਨਿ ਕਿ " Eternal Religion " (ਇੰਟਰਨਲ ਰਿਲੀਜ਼ਨ) ਹੈ। ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਧਰਮ ਕੁੱਝ ਹੀ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਆਉਣ ਦੇ ਕਾਰਣ ਉਹ ਸੱਚ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਅਤੇ ਸੱਚ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਅਤੇ ਸਾਰਿਆਂ ਤੋਂ ਪੁਰਾਣਾ ਧਰਮ ਹੋਣ ਦੇ ਕਾਰਣ ਉਹ ਸੱਚਾ ਹੈ, ਅਤੇ ਕਈ ਸਾਡੇ ਹਿੰਦੂ ਭਰਾਵਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਉਹ ਵੀ ਆਖਦੇ ਹਨ, ਕਿ ਦੇਖੋ ਭਰਾਂ ਜੀ ਸਾਡਾ ਜੋ ਧਰਮ, ਉਹ ਸਦੀਵੀ ਹੈ ਦੁਨਿਆਂ ਦਾ ਸਾਰਿਆਂ ਤੋਂ ਪੁਰਾਣਾ ਧਰਮ ਹੈ। ਪਰ ਤੁਹਾਡੀ ਈਸਾਈਅਤ ਦਾ ਕੀ ?? ਉਹ ਤਾਂ ਸਿਰਫ਼, ਦੋ ਹਜ਼ਾਰ (2000) ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਆਇਆਂ। ਤਾਂ ਸਾਡਾ ਧਰਮ ਮਹਾਨ ਹੈ, ਵਧੀਆ ਹੈ ਅਤੇ ਸੱਚਾ ਹੈ।  

      ਤਾਂ ਇਸ ਪੰਨੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਬਿਆਨ ਨੂੰ ਦੇਖਾਂਗੇ ਜੋ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ, " Oldest Greatest And Truest " ਜਾਨਿ ਕਿ ਪੁਰਾਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਮਹਾਨ ਹੈ, ਅਤੇ ਸੱਚਾ ਹੈ। 

1.) ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਸੀਂ ਇਹ ਵੀ ਜਾਣ ਲਵਾਂਗੇ ਕਿ ਹਿੰਦੂਤਵ ਇਸ ਗੱਲ ਨਾਲ ਵੀ ਸਹਿਮਤ ਹੈ, ਅਤੇ ਕਹਿੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਜੋ " Eternity" ( ਇੰਟਨੀਟੀ) ਜਾਨਿ ਕਿ ਸੱਚ ਹੈ, ਉਹ ਵੀ " ਇੰਟਰਨਲ " ਸਦੀਵੀ ਹੈ। ਅਤੇ ਉਹ ਇਸ ਗੱਲ ਨੂੰ ਆਖਦੇ ਹਨ। " ਸਦੀਵੀ ਸੱਚ " 

1.1) ਜੇਕਰ ਸੱਚ ਸਦੀਵੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਉਸ ਸਮੇਂ ਦੀ ਸੀਮਾਂ ਵਿੱਚ ਸੀਮਤ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਕਲੈਂਡਰ, ਸਮੇਂ, ਸਾਲ, ਇਸ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਤੋਲ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ, ਮਾਪ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ ਤਾਂ ਕੀ ਇਹ ਕਹਿਣਾ ਬਿਲਕੁਲ ਗਲਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਕਿ ਪੁਰਾਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸੱਚ ਹੋਵੇਗਾ, ਅਤੇ ਸੱਚਾ ਹੋਵੇਗਾ। 

1.2) ਜੇਕਰ ਸੱਚ ਸਦੀਵੀ ਹੈ ਤਾਂ ਨਾਸ਼ ਮਨੁੱਖ ਜੋ ਵਿਨਾਸ਼ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਮਨੁੱਖ ਹੈ, ਖੁਦ ਦੀ ਤਾਕਤ ਨਾਲ ਉਹ ਉਸਨੂੰ ਬਣਾ ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ, ਅਤੇ ਪਛਾਣ ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ। 

1.3) ਜੇਕਰ ਸੱਚ ਸਦੀਵੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਸਿਰਫ ਉਸ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ " ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਪੋਥੀ " ਜਾਨਿ ਕਿ " Revelation " ਤੋਂ ਖੁਲਾਸਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਵੇਗਾ, ਪਤਾ ਚੱਲੇਗਾ। 

1.4) ਜੇਕਰ ਸੱਚ ਲਗਾਤਾਰ ਮਨੁੱਖਾਂ ਨੂੰ ਕੁੱਝ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਮਿਲਿਆਂ ਆ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਮਤਲਬ ਇਹ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਉਸਦੇ ਪਹਿਲੇ ਉਸ ਸੱਚ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਨਹੀਂ ਸੀ। ਕਿਉਂਕਿ ਅਸੀਂ ਸੱਚ ਦੀ ਪਰਿਭਾਸ਼ਾ ਨੂੰ ਦੇਖਿਆਂ ਹੈ, ਉਹ ਸਦੀਵੀ ਹੈ। 

ਉਦਾਹਰਣ:- ਅਸੀਂ ਸਾਰੇ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ " Issac Newton" ( ਆਈਜ਼ੈਕ ਨਿਊਟਨ) ਨੂੰ ਜਿਹਨਾਂ ਨੇ "Gravitational Force" (ਗਰੈਵੀਟੇਸ਼ਨਲ ਫੋਰਸ) Discover (ਪ੍ਰਗਟ) ਕੀਤਾ ; ਜਿਸ ਨੂੰ ਹਿੰਦੀ ਵਿੱਚ ਗੁਰੂਤਵਕਸ਼ਣ ( गृरुत्वाकर्षण) ਅਤੇ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਗਰੈਵਿਟੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਜਾਨਿ ਕਿ ਜੋ ਧਰਤੀ ਵਿੱਚ ਖਿੱਚਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ, ਇਹ ਜੋ Discovery ਹੈ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਪਛਾਣ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਉਹ ਗਰੈਵਿਟੀ ਜਾਨਿ "Gravitational Force" ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਨਹੀਂ ਸੀ। 

2.) ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਇਹ ਗੱਲ Discover ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਗਈ, ਪੜ੍ਹਾਈ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਗਈ ਕਿ ਦੁਨਿਆਂ ਗੋਲ ਹੈ, ਪੁਰਾਣੇ ਜ਼ਮਾਨੇ ਤੋਂ ਕਈ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਲੋਕ ਇਹ ਮੰਨਦੇ ਆ ਰਹੇ ਸਨ ਕਿ ਧਰਤੀ ਫਲੈਟ (Flat) ਹੈ, ਤਾਂ ਕੀ ਅਸੀਂ ਪੁਰਾਣਾ (Belief) ਮਤ ਹਾਂ , ਕਾਫ਼ੀ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਲੋਕ ਮੰਨਦੇ ਹਨ ; ਤਾਂ ਕੀ ਅਸੀਂ ਮੰਨਣ ਲੱਗਾਂਗੇ??

       ਜੇਕਰ ਇਹ ਲਾੱਜਿਕ ਅਸੀਂ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲਦੇ ਹਾਂ ਪੁਰਾਣਾ ਸੱਚ ਹੈ, ਪੁਰਾਣਾ ਮਹਾਨ ਹੈ ਤਾਂ ਸਾਨੂੰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਅਜਿਹੀਆਂ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਨੂੰ ਮੰਨਣਾ ਪਵੇਗਾ। ਜੋ ਕਿ ਝੂਠ ਅਤੇ ਬੇਬੁਨਿਆਦ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਕਹਿਣਾ ਬਹੁਤ ਗਲਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ; ਕਿ ਜੋ ਪੁਰਾਣਾ ਹੈ ਉਹ ਸੱਚ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਸਦੀਵੀ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦਾ ਸਮੇਂ ਨਾਲ ਲੈਣ - ਦੇਣ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਉਹ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਹੀ ਬਾਹਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਜੋ ਬਿਆਨ ਹੈ ਕਿ (Christianity) ਈਸਾਈਅਤ ਲਗਭਗ ਦੋ ਹਜ਼ਾਰ (2000) ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਆਇਆਂ ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇੱਕ ਗੱਲ ਯਾਦ ਦਿਵਾਉਣਾ ਚਾਹੂੰਗਾ, ਮੇਰੇ ਈਸਾਈ ਅਤੇ ਹਿੰਦੂ ਭਰਾਵਾਂ ਨੂੰ ਕਿ ਬਾਈਬਲ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਜੋ ਹੈ ਉਹ ਉਤਪਤ ਦੀ ਕਿਤਾਬ ਪਹਿਲੇ ਅਧਿਆਏ, ਪਹਿਲੇ ਵਚਨ Space, Time, Matter ( ਜਗ੍ਹਾ/ਸਥਾਨ, ਕਾਲ, ਵਜ੍ਹਾ) ਦੁਨਿਆਂ ਦੀ ਰਚਨਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਾ ਕਿ ਵਿਚਕਾਰੋਂ। 

      ਦੂਸਰੀ ਗੱਲ ਯਿਸੂ ਮਸੀਹ ਜੋ ਹੈ, ਉਹ ਸਿ੍ਰਸ਼ਟੀ ਕਰਤਾ ਹੈ ਅਸੀਂ ਬਾਈਬਲ ਵਿੱਚੋਂ ਪੜ੍ਹ ਸਕਦੇ ਹਾਂ। 

" ਸੱਭੋ ਕੁਝ ਉਸ ਤੋਂ ਰਚਿਆ ਗਿਆ ਅਤੇ ਰਚਨਾ ਵਿੱਚੋਂ ੲਿਕ ਵਸਤੁ ਭੀ ਉਸ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਨਹੀਂ ਰਚੀ ਗਈ। (ਯੂਹੰਨਾ. 1:3)"

  " ਉਹ ਅਲੱਖ ਪਰਮੇਸ਼ੁਰ ਦਾ ਰੂਪ ਅਤੇ ਸਾਰੀ ਸਰਿਸ਼ਟ ਵਿੱਚੋਂ ਜੇਠਾ ਹੈ। ਕਿਉਂ ਜੋ ਅਕਾਸ਼ ਅਤੇ ਧਰਤੀ ਉਤਲੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਉਸੇ ਤੋਂ ਉਤਪਤ ਹੋਈਆਂ, ਨਾਲੇ ਦਿੱਸਣ ਵਾਲੀਆਂ, ਨਾਲੇ ਨਾ ਦਿੱਸਣ ਵਾਲੀਆਂ, ਕੀ ਸਿੰਘਾਸਣ, ਕੀ ਰਿਆਸਤਾਂ, ਕੀ ਹਕੂਮਤਾਂ, ਕੀ ਇਖਤਿਆਰ, ਸੱਭੋ ਕੁਝ ਉਸ ਦੇ ਰਾਹੀਂ ਅਤੇ ਉਸੇ ਦੇ ਲਈ ਉਤਪਤ ਹੋਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੈ ਅਰ ਸੱਭੋ ਕੁਝ ਉਸੇ ਵਿੱਚ ਕਾਇਮ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ" ( ਕੁਲੁੱਸੀਆਂ. 1:15-17)। 

    " ਹੇ ਸਾਡੇ ਪ੍ਰਭੂ ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਪਰਮੇਸ਼ੁਰ, ਤੂੰ ਮਹਿਮਾ, ਮਾਣ, ਅਤੇ ਸਮੱਰਥਾ ਲੈਣ ਦੇ ਜੋਗ ਹੈ, ਤੈਂ ਜੋ ਸਾਰੀਆਂ ਵਸਤਾਂ ਰਚੀਆਂ, ਅਤੇ ਉਹ ਤੇਰੀ ਹੀ ਇੱਛਿਆ ਨਾਲ ਹੋਈਆਂ ਅਤੇ ਰਚੀਆਂ ਗਈਆਂ ! ।। ( ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਦੀ ਪੋਥੀ. 4:11)। 

ਤਾਂ ਯਿਸੂ ਮਸੀਹ ਸਿ੍ਰਸ਼ਟੀ ਕਰਤਾ ਹੋਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਯਿਸੂ ਮਸੀਹ ਸਦੀਵੀ ਹੈ, ਯਿਸੂ ਮਸੀਹ ਸਦੀਵੀ ਖੁਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਖੁਦਾ, ਇਹ ਪਰਮੇਸ਼ੁਰ ਦੋ ਹਜ਼ਾਰ (2000) ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਮਨੁੱਖ ਬਣਕੇ ਇਸ ਧਰਤੀ ਤੇ ਆਇਆ ਅਸੀਂ ਇਸਨੂੰ ਇਬਰਾਨੀਆਂ. 1:1-2 ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹ ਸਕਦੇ ਹਾਂ,  " ਪਰਮੇਸ਼ੁਰ ਨੇ ਜਿਨ ਪਿਛਲਿਆਂ ਸਮਿਆਂ ਵਿੱਚ ਨਬੀਆਂ ਦੇ ਰਾਹੀਂ ਸਾਡੇ ਵੱਡਿਆਂ ਨਾਲ ਕਈਆਂ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਸੀ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਸਾਡੇ ਨਾਲ ਪੁੱਤਰ ਦੇ ਰਾਹੀਂ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਜਿਹ ਨੂੰ ਉਹ ਨੇ ਸਭਨਾਂ ਵਸਤਾਂ ਦਾ ਵਾਰਸ ਬਣਾਇਆ ਅਤੇ ਉਸੇ ਦੇ ਵਸੀਲੇ ਉਹ ਨੇ ਜਹਾਨ ਵੀ ਰਚੇ। "  ਤਾਂ ਪਰਮੇਸ਼ੁਰ ਜੋ ਹੈ ਸਦੀਵੀ ਹੈ, ਯਿਸੂ ਮਸੀਹ ਸਦੀਵੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਹ ਸਿ੍ਰਸ਼ਟੀ ਕਰਤਾ ਹੈ, ਉਹ ਇਸ ਧਰਤੀ ਤੇ ਜਨਮ ਲੈਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਦਾਵਾ ਕੀਤਾ ਯੂਹੰਨਾ. 14:6 " ਰਾਹ ਅਤੇ ਸਚਿਆਈ ਅਤੇ ਜੀਉਣ ਮੈਂ ਹਾਂ।"

    ਸੋ ਸਦੀਵੀ ਪਰਮੇਸ਼ੁਰ ਦਾਵਾ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿ " ਸਚਿਆਈ ਮੈਂ ਹਾਂ"  ਤਾਂ ਉਹ ਸਦੀਵੀ ਸਚਿਆਈ ਹੈ। ਅਤੇ ਉਸ ਦਾਵੇ ਨੂੰ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਸਿਰਫ ਦਾਵਾ ਨਹੀਂ ਰੱਖਿਆ, ਬਲਕਿ ਭਵਿੱਖਬਾਣੀਆਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਕੇ, ਮਰਕੇ ਤੀਸਰੇ ਦਿਨ ਦੁਬਾਰਾ ਜੀ ਉਠ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਸਾਬਿਤ ਕੀਤਾ, ਅਤੇ ਉਹ " ਸਦੀਵੀ ਸੱਚ ਯਿਸੂ ਮਸੀਹ ਹੈ। "

  ਤੇ ਹਿੰਦੂਤਵ ਦਾ ਦਾਵਾ ਹੈ ਕਿ ਜੋ ਪੁਰਾਣਾ ਹੈ, ਤੇ ਸੱਚਾ ਅਤੇ ਮਹਾਨ ਹੈ ਤਾਂ ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੱਸਣਾ ਚਾਹੂੰਗਾ। ਸਦੀਵੀ ਸੱਚ ਜੋ ਹੈ ਉਹ ਸਮੇਂ ਨਾਲ ਸੀਮਿਤ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਅਤੇ ਇਹ ਕਹਿਣਾ ਬਹੁਤ ਗਲਤ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਕਿ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਕਲੈਂਡਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕੋਈ ਚੀਜ਼ ਸੱਚ ਹੈ ਜਾਂ ਫਿਰ ਉਹ ਝੂਠ ਹੈ। 

Translation by Sister Kiran Sona

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लूत और उनकी बेटियाँ - पूरा सच (Lot & Daughters)



जय मसीह की मेरे प्रिय भाई-बहनों आप सभी को प्रभु यीशु मसीह के नाम से बधाई देता हूँ। और पिछले कुछ दिनों से आप देखते आ रहे हैं, कि किस प्रकार मसीह विरोधियों का विशेष तौर पर राहुल मलिक जैसे लोगों के सवालों का जवाब हम पेश करते आ रहे हैं, और बाइबल की सुन्दरता को हम जाँच रहे हैं।

जब हम बाइबल पढ़ते है उसकी परिपूर्णता में कॉन्टेक्स्ट में और सन्दर्भ में, तो हमें पता चलता है कि बाइबल की सुन्दरता क्या है? और इस प्रकार के लोग केवल बाइबल का मज़ाक बनाना चाहते हैं और उनके हृदय में जो गन्दगी है वह गन्दगी के साथ सब जगह गन्दगी ढूँढने के कारण उन्हें सिर्फ गन्दी चीजें नजर आती हैं।

तो चलिए, आज भी इस वीडियो के क्लिप में एक विशेष मुद्दें की ओर चलते है, जो राहुल मलिक जैसे लोग हमेशा आगे लेकर आते हैं।

राहुल आर्या: पैगम्बर लूत ने अपनी दोनों बेटियों को गर्भवती किया, यह विषय अत्यंत खराब होने के कारण छोड़ दिया..।

तो इस वीडियो क्लिप में राहुल मलिक ने कहा है कि पैगम्बर लूत ने अपने बेटियों को गर्भवती कर दिया और यह बहुत ही गन्दा विषय होने के कारण उन्होंने छोड़ दिया है, लेकिन उनके कुछ पहले वालें वीडियो में उन्होंने इन बातों का ज़िक्र किया है।

राहुल आर्या : ईसाइयों ने जो है अपने बाइबल में, ईसाइयों के बाइबल में, जो उत्पत्ति 19,20 उन में काफी यह चर्चा है। पैगम्बर लूत ने अपने ही बेटी के साथ ज़िना किया ज़िना समझते हो अर्थात अपने ही बेटियों के साथ उन्होंने सेक्स किया .............।

तो यह सवाल का जवाब हमें जानना बहुत जरूरी है और कुछ ईसाई यह भी पढ़ते समय में (Uncomfortable Feeling) असहज भावना आती है और जैसे मैं ने पिछले वीडियो में कहा, असहज भावना हमें तब आती है जब बाइबल को हम उसके सन्दर्भ में नहीं समझ पाते है। दोस्तों, जब भी हम बाइबल पढ़ते है और ऐसी कोई घटना आती है जिसे देखर आप असहज भावना लाते हो, तो आपको सब से पहला यह सवाल पूछना जरूरी है। क्या यह बाइबल इन चीजों को बढ़ावा दे रही है? इन चीजों को करने के लिए कह रही है? या फिर वहाँ पर (रोकॉर्डड्) दर्ज की गई है।

बाइबल की सुन्दरता यह है, बाइबल इतिहास में जो घटना हुईं हैं उन बातों को जैसा है वैसा ही (रिकॉर्ड) अभिलेख करता है, सामान्य रूप से धर्म ग्रथों में देखेंगे तो वो धर्म ग्रथों के जो शूरवीर होते है या फिर जो महापुरुष होते है उनके बारे में अच्छा-अच्छा ही लिखा जाता है और यह सच है इतिहास वही लिखते है जो जीतते है, जो हार जाते है वह इतिहास को लिखते नहीं हैं और ये चीज़ आप को देखने मिलता है राहुल मलिक के वीडियो में जब भी कोई गलत बात वेद में दिख जाए, मनुस्मृति में दिख जाए या फिर कोई भी उनके धर्म ग्रथों में दिख जाए वह कहते है कि ये मिलावट है, ये बदल दिया गया है, ये भी विशुद्ध है। "क्योंकि सत्य को सत्य जैसा प्रस्तुत करने के लिये किसी के पास हिम्मत नहीं है।" लेकिन बाइबल इतिहास में घड़ी हुईं कोई भी बात हो उसको ऐसे ही (रिकॉर्ड) अभिलेख करती है चाहे वह परमेश्वर की प्रजा का लज्जा होने वाली बात हो, परमेश्वर के नबियों ने जो गलत काम किया उसको भी वैसी ही अभिलेख करता है।

सब से पहले सवाल आपको पूछना है, क्या यह घटनाओं से बाइबल हमें यह शिक्षा देती है कि हमें भी उसे अनुसरण करना चाहिए? बिल्कुल नहीं, पूरे बाइबल में अगर आप पढ़ेंगे ऐसी चीजें आपको कहीं पर भी नहीं  मिलेंगी असल में बाइबल जो है लैव्यव्यवस्था में सफ़ाई से हमें यह आज्ञा देती है कि ऐसे प्रकार के सम्बन्ध में नहीं जुड़ना हैं माँ और बेटा या फिर पिता और बेटी।

आपने पिछले वीडियो में ये रेफरेन्स देखा होगा अगर नही देखा है तो वो वीडियो को एक बार देख लीजिए।

तो यह जो घटना है वो बाइबल में (रिकॉर्ड) अभिलेख किया गया है, (Suggest) सुझाव नहीं दिया गया है एक छोटा-सा उदाहरण देता हूँ आपको समझने के लिए और दूसरों को समझाने के लिये।
उदाहरण : एक न्यूज़ पेपर जब आप पढ़ते है, न्यूज़ पेपर में बहुत सारी घटनाएँ अभिलेख की जाती है बलात्कार के बारे में, क़त्ल के बारे में युद्ध  के बारे में, डकैती के बारे में, चोरी के बारे में, धोखा के बारे में, तो क्या यह कहेंगे कि देखों टाइम्स ऑफ इंडिया में या फिर मुंबई मिरर में या फिर कोई भी न्यूज़ पेपर में यह सारी बातें लिखी हुईं है; मतलब वो न्यूज़ चॅनल वाले, वो न्यूज़ पेपर वाले ये सब करने को कह रहे हैं??

तो आपको समझ में आ गया होगा इतने सरल तर्क से  कि लोग किस प्रकार बाइबल को गलत तरीके से समझते है। बाइबल में लिखा है न! इसका मतलब यह नहीं कि वह करना, वैसे ही न्यूज़ पेपर में जो लिखा है हमारे लिए वो जानकारी के लिए लिखी गई है आप सोच सकते हो इसमें क्या जानकारी हमें मिलती है? बहुत सारी चीजें आप इस घटनाओं से सिख सकते हो।

दूसरी बात, सन्दर्भ क्या है? आप इसको पढ़ सकते हो, उत्पत्ति 19 अध्याय में, जब उत्पत्ति की किताब 19 अध्याय आप पढ़ते हो वहाँ पर आपको एक घटना दिखाई देता है, एक कहानी आपको दिखाई देती है जहाँ पर बअब्राहम और लूत के बीच में बातचीत होती है और लूत जो है अपने लालसा के कारण जो चीज़ अच्छी दिखी उसी शहर में चले जाते। लेकिन जब हम बाइबल पढ़ते है, जो शहर को लूत ने चुना था "सदोम और अमोरा" वह जो पाप से भरा हुआ शहर है करके हम बाइबल में पढ़ते है तो ऐसा एक स्वार्थी मकसद ने लूत के स्वार्थी मकसद ने उसके आगे की जिंदगी को किस प्रकार बिगड़ा है।

आप 18,19 अध्याय में सब पढ़ेंगे, तो आपको पता चलेगा।

किस प्रकार लूत को जो है, वो शहर छोड़ना पड़ा, उस शरह को आग से जला दिया गया और असल में लूत ने अपने पत्नी को भी गवाँ दिया। इतना ही नहीं लूत जो है परमेश्वर के नजरों में धर्मी ठहरने के कारण परमेश्वर ने लूत और उसके परिवार को तो बचाया लेकिन उसके पत्नी को खो दिया। जैसे ही लूत उस शरह से बाहर आ गए, लूत ने पहली गलती की थी "(Selfishness) स्वार्थपरता" की जहाँ पर उन्होंने आँख से दिखने वाली जगहों को चुना और दूसरा स्वार्थ का काम : गलत काम उन्होंने क्या किया? उन्होंने वहाँ पर शराब पी लिया और नशीले पदार्थ का सेवन कर लिया।

जब हम बाइबल में जाते है तो हमें पता चलता है कि, नीतिवचन 20:1 वचन में सफ़ाई से पता चलता है कि ऐसे नशीले चीजों के बारे में बाइबल हमें क्या कहती?

"दाखमधु ठट्ठा करनेवाले और मदिरा हल्ला मचानेवाली है; जो कोई उसके कारण चूक करता है, वह बुद्धिमान नहीं (नीतिवचन20:1)।"

तो लूत ने यहाँ पर एक गलती की लेकिन वो गलती के बाद आगे क्या हुआ? आप पढ़ सकते हो, उत्पत्ति 19:30-33 तक, यहाँ पर एक घटना होती है वह घटना को हम पढ़ेंगे... "फिर लूत ने सोअर को छोड़ दिया, और पहाड़ पर अपनी दोनों बेटीयों समेत रहने लगा; क्योंकि वह सोअर में रहने से डरता था; इसलिए वह और उसकी दोनों बेटियाँ वहाँ एक गुफ़ा में रहने लगे (उत्पत्ति 19:30)।" तो यह जो सदोम और अमोरा के घटना के बाद लूत जो है डर कर अपने बेटियों के साथ वह पहाड़ पर रहने लगा। आगे पढ़ते है... "तब बड़ी बेटी ने छोटी से कहा, "हमारा पिता बूढ़ा है, और पृथ्वी-भर में कोई ऐसा पुरुष नहीं जो संसार की रीति के अनुसार हमारे पास आए। इसलिये आ, हम अपने पिता को दाखमधु पिला कर, उसके साथ सोएँ, जिस से कि हम अपने पिता के वंश को बचाए रखें। अतः उन्होंने उसी दिन रात के समय अपने पिता को दाखमधु पिलाया, तब बड़ी बेटी जा कर अपने पिता के पास लेट गई; पर उसने न जाना, (लूत ने न जाना) कि वह कब लेटी, और कब उठ गई (उत्पत्ति19:31-33)।"

अगर आप पूरा पढ़ते जायेंगे आपको सब से पहला वचन में यह पता चलता है कि लूत की बेटियों का (Assumption) कल्पना यानी कि वो ये सोच में आ गई कि हमारा पीढ़ी आगे नहीं बढ़ेगा। यह सब से पहली उनकी गलती थी, उन्होंने परमेश्वर के हवालें अपने भविष्य को देने के बजाय उन्होंने खुद निर्णय लिया, मान लिया कि कोई भी व्यक्ति बचा नहीं है, कोई भी पुरुष बचा नहीं है, उनको लगता है कि सदोम-अमोरा खत्म मतलब पूरी दुनिया खत्म कोई भी पुरुष नहीं है लेकिन वहाँ पर उन्होंने मान लिया करके यह बहुत बड़ी गलती की और खुद का निर्णय हाथ में ले लिया।

दूसरा (Assumption) कल्पना के साथ-साथ हमने पढ़ा था उन्होंने अपने पिता को क्या किया? दाखमधु पिलाया और ये जब दाखमधु पिलाया इससे हमें पता चलता है यदि लूत अपने होश में होते तो यह कार्य करने नहीं देते तो दूसरा वो कार्य करवाने के लिए उन बेटियों ने क्या किया है? लूत को दाखमधु पिलाया, दूसरा हुआ "(Deception) डिसेप्शन यानी कि उसको धोखा दिया।

पहला हुआ (Assumption) कल्पना, दूसरा हुआ (Deception) धोखा, फिर हुआ (Action) क्रिया, मतलब उसके साथ पाप हुआ और लूत को पता ही नहीं चला। तो मैं यह नही कह रहा हूँ कि लूत जो है इस पाप के लिए (Innocent) बेगुनाह है। लूत ने शराब पीकर ऐसे पाप का दरवाजा खुला कर दिया है उसके अनजाने में यह सब होने के लिए और उसके बाद क्या हुआ?
उसके बाद पाप होने के बाद उसके द्वारा मोआब और अम्मोन जैसे पीढ़ी पैदा हुईं। कुछ लोगों को लगता है इसके बाद कुछ नहीं हुआ? बिल्कुल नहीं!, यह भयंकर पाप के कारण जो पीढ़ी उनके बेटियों के द्वारा आगे आई मोआब और अम्मोन यह हमेशा परमेश्वर के प्रजा के विरुद्ध रहते थे, उनको परेशान करते रहते थे और उनका क्या हुआ घटना अगर आप पूरा घटना पढेंगे (न्यायियों 3:29,30) में, किस प्रकार मोआब जाति को ढाया जा रहा था, किस प्रकार उनको मिटाया जा रहा था, क्योंकि ऐसे पाप से निकलने वाले पीढ़ी का विनाश जो है वो होगा ही। उसके बाद क्या हुआ? यह जो गलत तौर पर जन्मी हुईं ये पीढ़ी है वह पीढ़ी न कि परमेश्वर के विरुद्ध रहने लगे बल्कि वह अन्य देवताओं के पीछे चलने लगे केमोश और मिल्क़ोन (1 राजाओं 11:33)।

तो दोस्तों, यहाँ पर हमें यह घटना से यह पता चल रहा है कि बाइबल बाप बेटी के बीच में गलत रिश्ता को बढ़ावा नहीं दे रहा है, एक घटना घटी है और उस घटना को वैसे ही दिखाया गया है और यह घटना से हम ईसाइयों को क्या सिख मिलता है? सब से पहले जैसे लूत ने किया वैसे यह दाखमधु का सेवन करने से हम जो है अपना संयम छोड़ देते है और गलत कामों के लिए हम अनुमति देते है।

दूसरा लूत की बेटीयों ने मान लिया उनको लगा कि कोई परमेश्वर हमें मदत करने वाला, हमें हमारा भविष्य का तय खुद करना पड़ेगा आज लोग भी यहीं सोचते है कि हमारा भविष्य हमकों ही बनाना है इसलिए वो खुद निर्णय लेते है। किस प्रकार का उन्होंने निर्णय लिया?  गलत तरीके का निर्णय लिया उसके पिता को दाखमधु पिलाकर उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने का गलत निर्णय लिया। आज जवान भाई-बहन या फिर बहुत सारे लड़के लड़कियाँ ऐसे ही गलत निर्णय लेते है सोचते है कि भविष्य में मैं मेरा क्या होने वाला है मुझे पता नहीं और वो खुद गलत निर्णय लेकर अपने आप को धोखे में  डालकर साथ में व्यक्ति को धोखे में डालकर गलत सम्बन्ध बनाती हैं और उनके द्वारा जो पीढ़ी निकलती है। जैसे लूत के बेटियों के लिए और परमेश्वर के जातियों के लिए हमेशा वह तकलीफ़ दायक रहा, वैसे हमारा निर्णय अगर परमेश्वर की महिमा से नहीं है, परमेश्वर के मर्जी से नहीं है, खुद के मर्जी से, गलत तरीके से अगर तिरछे नजर से निकलते हुए परिणाम होंगे तो हमारे जिन्दगी में हमेशा, दर्द तकलीफ़ होती आयेगी। यही ये घटनाओं से हमें सीखने को मिलता है।

एक और बात मैं आपको बताना चाहूँगा लूत की बेटीयाँ अपने पिता से लालसा करके, लालच करके या फिर शारीरिक सम्बन्ध काम वेदना बढ़कर यह शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाई; उनका गलत कल्पना था कि आगे हमारी पीढ़ी क्या होगी? ये घटना हमें समझना बहुत जरूरी है हमारे प्रिय भाई बहनों मैं वापस से एक बार ये चीज़ को स्पष्ट करना चाहूँगा। बाइबल बातों को वैसे ही अभिलेख करती है जैसे घटी थी वह हटाएगी नहीं चाहे पढ़ने वालों को गन्दा लगे या अच्छा लगे जो घटना घटी उसे वैसे ही (रिकॉर्ड) अभिलेख करती है ताकि उन चीजों देखकर हम सुधार ला सकते है। (2 तीमुथियुस 3:16) वचन में लिखा है कि बाइबल का हर एक वचन हमारे शिक्षा के लिये, ताड़ने के लिये, सुधारने के लिये, और हमारे धर्म की शिक्षा के लिये लिखी गई है और इन चीजों से क्या क्या सीख सकते है? मैंने आपको संक्षेप में बताया और विस्तार में पढ़ सकते है और जो मसीह विरोधी है इन गहराई को नहीं समझ सकते। लेकिन आशा करता हूँ आप समझ गए होंगे, दूसरों को भी समझाए, बाइबल की सुन्दरता को जानिए। अगर आपको अभी तक नहीं समझा है फिर से एक बार पढ़िए और वीडियो को देखिए और आपको समझने में आसानी होगी।

"बाइबल सुन्दर है उसे सुन्दर नजर के साथ देखों, क्योंकि जो पवित्र दिल से परमेश्वर के पास आते हैं वह परमेश्वर को दर्शन करता है और साथ-साथ परमेश्वर के शुद्ध वचनों को भी जानता है।"

प्रभु आप सभी को आशीष करें!

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क्या यीशु भारत में आकर वेदों को सीखें?



क्या यीशु कश्मीर/भारत आए?

जय मसीह की भाई और बहनों मैं फ्रांसिस आप सभी का त्रिज्ञा परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह के नाम से स्वागत करता हूँ। यीशु मसीह एक ऐसे शख़्स हैं जिनके बिना सब कुछ अधूरा हैं : इतिहास अधूरा हैं, आत्मिकता अधूरा हैं, लोगों का प्रचार भी अधूरा हैं, क्यों मैं ऐसे कह रहा हूँ?? आप मुस्लिम को देखिए, उनके प्रचार में उनके दावा में उनको यीशु चाहिए। मोरमोंस को यीशु चाहिए, हरे कृष्णा वालों को भी यीशु चाहिए आजकल हर किसी को यीशु चाहिए क्योंकि यीशु के बिना सब कुछ अधूरा हैं और यह अच्छी बात हैं क्योंकि हमारा यीशु है युनिक, हमारा यीशु है, अलग हर कोई चाहेगा, कोई दिक्कत नहीं। लेकिन कुछ लोग हैं वो यह कहते हैं और यह साबित करने की कोशिश करते हैं, कि यीशु भारत आए थे।

राहुल आर्या :  देखिए, जब आपके ईसा मसीह जीसस ने इस्त्राएल में जब गए यहाँ से भारत आने से का प्रचार करके .... वेदों का शिक्षा अध्ययन करके वहाँ पर प्रचार करने के लिए जब गए........।

यह हैं न! चौकाने वाली बात जी, आज इसी बात पर हम थोड़ा नजर डालेंगे और देखेंगे कि सच क्या है? आगे बढ़ने से पहले हमें जानना जरूरी हैं कि यह सोच कहाँ से सुरू हुआ होगा? यदि आप बाइबल पढ़ते हैं तो आपने एक चीज़ देखा होगा। जब यीशु मसीह का उम्र बारह होता हैं वो तब दिखाई देते हैं फिर उसके बाद सीधा वह तीसवें उम्र में जब वो बपतिस्मा लेते हैं जब सेवा सुरू करने के लिए वहाँ पर दिखाई देते हैं। तो बारह से लेकर तीस लगभग सतरा से अठारह साल यीशु मसीह का जिंदगी कैसा था? यीशु मसीह कहाँ गए थे? यीशु मसीह ने क्या किया? ये सवाल बहुत सारें लोगों के मन में आया और यह सवाल को ढूँढने के लिए सुरू कर दिया। शायद, आपके मन में भी यह सवाल आया होगा कि यीशु कहाँ गए थे? मेरे मन में भी यह सवाल आया था। तो सवाल गलत नहीं हैं लेकिन कुछ लोगों ने यह कहना सुरू कर दिया कि यीशु मसीह भारत आए थे और कश्मीर आए थे। क्यों आए थे?? घूमने के लिए जी नहीं, उनका कहना हैं कि यीशु मसीह भारतीय गुरुओं से, और संतों से शिक्षा लेने के लिए भारत आए थे। यीशु education शिक्षा के लिए भारत आए वो कहते कि यीशु मसीह ने भारतीय गुरुओं से, संतों से और बाबाओं से प्रवचन कैसे देना हैं वो सीखा, शास्त्र को सीखा, वेदों को सीखा, ज्ञान वाले बातों को सीखा और वो अपने प्रदेश लौटकर यहाँ पर जो वेद, शास्त्र, ज्ञान, प्रवचन सीखा। वहाँ पर अपने लोगों को सिखया और चेलों को भी सिखाया। क्या यह सच हैं?? क्या वाक़ई में यीशु मसीह भारत आए थे, कश्मीर आए थे?? क्या उन्होंने यहाँ पर जो शिक्षा ली थी। वेद-शास्त्र की वो अपने प्रदेश में सिखाए, चेलों को सिखाए थे। क्या बाइबल में वहीं लिखा हैं?? यह सारे सवालों को जवाब जो हैं हमे बाइबल में ढूंढा बहुत जरूरी हैं, हमें जानना जरूरी हैं इस विषय में बाइबल क्या कहती हैं??

तो, बाइबल के आधार पर मैं आपको पाँच कारण बताना चाहूँगा। जिससे साफ़ साबित होता हैं कि यीशु मसीह भारत नहीं आए थे, कश्मीर नहीं आए थे।

पहिला कारण: यहूदियों की प्रथा थी जो व्यक्ति जो भी व्यापार करता था अपने बेटों को वो सीखता था उदाहरण के तौर पर अगर कोई लकड़े का काम करता था, सुतार का काम करता था तो, अपने बेटों को वो सिखाता था। अगर आप मरकुस की किताब 6:3 और मत्ती की किताब 13:55 पढ़ते हैं, इससे हमें साफ़-साफ़  पता चलता हैं कि यीशु मसीह को जो हैं लोग एक बढ़ई के नाम से, एक सुतार के नाम से, काफी समय से पहचानते थे। अब यह  वचनों को पढ़के देखिये, उसमें साफ़-साफ़ लिखा हैं लोग यीशु को देखकर कहते हैं ये तो वही बढ़ई हैं न!, ये तो वहीं सुतार हैं न! ये युसुफ का बेटा हैं न! ये तो मरियम का लड़का हैं न! जो सुतार का बेटा हैं इसका भाई यह हैं, इसके रिश्तेदार यह हैं, तो वहाँ के लोग यीशु मसीह को बचपन से जानने के कारण आसानी से पहचान पा रहे हैं थे कि ये वहीं यीशु हैं न! तो पहिले पॉइंट में मैं आपको यह बताना चाहूँगा कि उस समय के लोग यीशु मसीह को बचपन से जानते थे और उसकी पहचान क्या है करके हम ने यह वचन में देख लिया इससे साफ़ साबित होता हैं कि यीशु मसीह कश्मीर नहीं आए यीशु मसीह भारत देश नहीं आए।

दूसरा कारण: दूसरी बात अगर आप लुका की किताब 4:16 पढ़ेंगे, उसमें आपको और भी सफ़ाई से पता चलेगा उसमें लिखा है रीति के अनुसार यानि कि हमेशा कि तरह यीशु मसीह भवन में गया। यह कैसे सम्भव हैं? अगर यीशु मसीह 12-30 उम्र यानी कि सतरा से अठारह साल उन्होंने अपना बचपन और थोड़ा-सा जवानी का समय भारत में बिताया होता। तो हमेशा की तरह भवन कैसा जा सकते थे?? सोचने वाली बात हैं और उसी वचन में लिखा हैं कि यीशु मसीह का पालन-पोषण जो हैं वो नासरत में हुआ तो ये वचन लुका 4:16 साफ़-साफ़ बताता हैं कि यीशु मसीह भारत नहीं आए कश्मीर नहीं आए। क्योंकि वो पले-बड़े पालन-पोषण वहीं पर था उनका नासरत में और हमेशा के जैसा वो नासरत में जाकर भवन में उपस्थित रहते थे।

तीसरा कारण: जब यीशु मसीह प्रचार कर रहे थे तो उस समय में जो लोग थे जो फरीसी लोग थे और बहुत सारें यीशु के विरोध करने वाले लोग थे। उन्होंने यीशु के ऊपर कई सारे इल्ज़ाम लगाए उन्होंने यीशु के ऊपर यह भी इल्ज़ाम लगाया कि तुम सब्त को तोड़ते हो परमेश्वर के विरोध बात करते हैं तुम ईश-निंदा करते हो, तुम्हारे अंदर शैतान की आत्मा है; ऐसे यीशु के ऊपर काफी सारे इल्ज़ाम लगे। लेकिन एक चीज़ आप देखिए, कि चारों सुसमाचार के किताब में ऐसा कोई भी इल्ज़ाम यीशु मसीह के ऊपर लगा नहीं कि तुम दूसरे प्रदेश के और दूसरे शास्त्र के शिक्षा को तुम यहाँ पर बाट रहे हो। तो, देखिए उनके विरोध करने वालों ने भी, कभी  उनको ये चीजों के ऊपर में इल्ज़ाम नहीं लगाया, दोष नहीं लगाया कि तुम भारत से सीखे हुए मंत्र को श्लोका को और ज्ञान को, और प्रवचन को यहाँ पर तुम बाटते हो करके, इससे साफ साबित होता हैं कि यीशु मसीह भारत भी नहीं आए यह मेरा तीसरा पॉइंट हैं।

चौथा कारण: अब यीशु मसीह के बारे में अगर आप देखोगे, तो यीशु मसीह पुराने नियम में तोरह में, भजन संहिता में और भविष्यद्वाक्ताओं के किताब में बहुत ही निपुण थे। आज के जमाने में स्कॉलर जो उस्ताद जो हैं पुराना नियम, इब्रानी ज़बान, तोरह और  भविष्यद्वाक्तायों की किताब को जाँचने के लिए सालों बिता देते हैं। लेकिन यीशु मसीह का जो ज्ञान था तोरह से और पुराने नियम से इतना ज्यादा था तो हमें सोचने में मजबूर करता हैं क्या वाक़ई में यीशु मसीह भारत में से शिक्षा लिए?? अगर यीशु मसीह भारत में से शिक्षा लिए तो भारत के वेद-शास्त्र में से कभी भी एक भी बात उन्होंने कोई भी वचन, कोई भी शास्त्र, कोई भी श्लोका मंत्रों को क्यों नहीं बोला?? क्यों यीशु मसीह के प्रचार में वो हमेशा पुराने नियम को ही संकेत करते थे पुराने नियम से ही बात करते थे। और मैं आपको ये चीज बताना चाहूँगा दोस्तों, कि ये जो यहूदी लोग है बहुत ही स्मार्ट हैं वो बहुत ही निपुण हैं वो आप किस तरीके से बात करते है उससे भी पहचान लेते हैं कि आप  कहाँ के हो। जब यीशु मसीह को पकड़के ले गए तो पतरस डर के भाग रहे थे (मत्ती 26:73)। तो, कुछ लोग खड़े थे तो उन्होंने सीधा पतरस को देखकर क्या कहा तुम्हारे बात करने के तरीके से हमको लगता है कि तुम उसके साथ हो देखो, कितने निपुण हैं वो, वो बात करने के तरीके से भी उनको पता चल जाता हैं। यदि यीशु भारत आए होते, सतारा-अठारह साल थोड़ा समय नहीं होता हैं दोस्तों, सतरा-अठारह में यीशु मसीह का बात करने का तरीका भी बदला होगा। यीशु मसीह पूरे के पूरे जो हैं वो यहूदियों का रीति-रिवाजों को वो करते आते थे पुराने नियम के बलिदानों को, पुराने नियम के त्याहारों को, फसल को सब अनुसरण करते थे लेकिन एक भी बार भारत देश में से सीखे हुए कोई भी कार्य को उन्होंने अनुसरण क्यों नहीं किया?? तो कहीं पर भी ऐसा प्रमाण नहीं हैं कि यीशु मसीह ने भारत में से शिक्षा लिया और वहाँ पर शिक्षा दिए कभी भी भारतीय वेद को उन्होंने संकेत नहीं किया यह मेरा चौथा पॉइंट हैं।

भारत का थोड़ा तो स्वाद होना चाहिए वहाँ पर जाने के बाद, कुछ भी नहीं हैं।

पाँचवा कारण: मैं आपको कहना चाहूँगा बढ़िया पॉइंट हैं, यीशु मसीह ने सिखाया परमेश्वर एक है जी हाँ, लेकिन भारत में जो गुरु हैं संत हैं उनका मानना क्या हैं भारत में तो तैतीस करोड़ परमेश्वर को मानते हैं।

कुछ लोग यह कहकर बहाना बनाएँगे तैतीस करोड़ नहीं तैतीस प्रकार हैं description में दिये लिंक का आर्गुमेंट साबित करता हैं तैतीस करोड़ ही हैं।

अभी हिन्दू खुद आपस में मिलकर निर्णय करें कितने है, चाहे कितने भी हो यीशु ने तैतीस करोड़ या तैतीस प्रकार के नहीं एक ही खुदा का प्रचार किया हैं।

भारत में गुरुओं और लोगों का मानना है कि खुदा ने कुदरत को बनाया कुदरत ही खुदा हैं आप भी खुदा हो सकते हैं तो यहाँ पर देखिए, खुदा का जो नजरिया है। परमेश्वर को जो जानने का ज्ञान हैं वो बिलकुल अलग नहीं हैं यहूदियों से परमेश्वर यीशु मसीह जो सीखाते थे वो अलग था और जो भारत देश के गुरु जो मानते हैं वो अलग हैं तो यह पाँच पॉइंट्स से मैं साफ साबित कर चुका हूँ, कि यीशु मसीह भारत देश में नहीं आए थे।

पहला पॉइंट यहूदी लोग और वहाँ के नासरत के लोग यीशु मसीह को पहचानते थे उनके व्यापार से और परिवार से।

दूसरा पॉइंट हमेशा की तरह यीशु मसीह भवन में जाया करते थे और उनका पालन-पोषण वहीं पर हुआ था।

तीसरा पॉइंट यीशु मसीह के दिनों में लोगो ने उनको बहुत सारे चीजों से दोष लगाया लेकिन कभी भी दूसरे प्रदेश के ज्ञान के बारे में शिक्षा देने के दोष में उनको कभी नहीं खड़ा किया।

चौथा पॉइंट यीशु मसीह हमेशा शास्त्र के नाम पर पुराने नियम से ही उन्होंने बाते बताई न कि दूसरे शास्त्र से, दूसरे वेद , दूसरे देश से।

पाँचव पॉइंट यीशु मसीह ने सिखाया एक परमेश्वर हैं लेकिन भारत के गुरु, संत मानते हैं कि बहत सारे खुदा हैं तैतीस करोड़ हैं आप भी खुदा बना सकते हैं मैं भी खुदा बन सकता हूँ।

क्यों यह झूठ फैल रहे हैं?? बाइबल हम पढ़ते हैं कि झूठो का पिता हैं कौन? शैतान हैं झूठ। वो चाहता है कि किसी भी हालत में हम रास्ता भटक जाये क्योंकि ये जितने भी लोग आकर कहते हैं यीशु नबी हैं, यीशु शैतान का भाई हैं और यीशु एक अच्छे शिक्षक हैं वो भारत आए थे कश्मीर गए थे तीबेत गए थे ग्रेकमिलियन  गए थे वो सारे चीज यह कहना चाहते हैं, कि यीशु एक व्यक्ति थे सिर्फ, नबी के रूप में, शिक्षक के रूप में, गुरु के रूप में लेकिन खुदा नहीं क्योंकि शैतान भी यहीं चाहता हैं कि आप अपना विश्वास छोड़ दे। जिस समय आप विश्वास छोड़ दोगे कि यीशु खुदा नहीं हैं करके उस समय शैतान का पूरा काम हो गया लेकिन हमारा परमेश्वर बहुत महान हैं उनका सत्य हमेशा अटल है उनका वचन हमेशा अटल है वो हमेशा अंधकार के ऊपर प्रबल होते हैं। और दोस्तों, अगर आपके मन में कभी भी ऐसा कोई भी सवाल आए तो आप तुरंत निर्णय न लीजिये आप बाइबल खोलिए, आप बाइबल को पढ़िये प्रार्थना कीजिये पवित्र आत्मा का सहायता   मांगिए। सारे झूठ दूर हो जाएँगे सत्य को जानिए और सत्य आपको छुड़ाएगा "यीशु ही खुदा हैं।"

पचास कारण पेश किया है यह साबित करते हुए कि यीशु ही खुदा है। आप उन पचास कारण को देखिए और सीखिए, लोगों को सिखाइए, सुसमाचार बांटिए।

"यीशु ही खुदा है" यीशु के अलावा उद्धार नहीं, पूरे आकाश में, निचे पृथ्वी में, कहीं पर भी यीशु के नाम के अलावा उद्धार नही है, और यह सत्य को जानिए। दोस्तों को बताइए यह सत्य आप को भी छुड़ाएगा, आपके दोस्तों को भी छुड़ाएगा।
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Transcription: Sushma Gupta
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10 Christian Riddles by Ijaz Ahmad - Refuted

10 Christian Riddles by Ijaz Ahmad - Refuted
-By Francis

One of my friends shared an article (http://callingchristians.com/2013/11/05/10-christian-riddles/) and asked me to share my thoughts. The article gave me a good laugh because the author was/is clueless about the christian worldview.
Here I would like to present my responses to the self proclaimed scholar Mr. Ijaz Ahmed.
Riddles, questions, thoughts, I wonder what the answers to these would be?
Instead of wondering why don't you ask the people who are reading the bible just like Muhammad was commanded to (Quran 10:94). Oh you asked?? Lemme respond.
These aren't meant to be insulting, and we do apologize if they seem to be so, these are just honest inquiries into the Christian faith.
I never knew honest inquiries could be so lame and senseless. Nevertheless, I would respond so the hidden objective of yours to mock Jesus is exposed.
Let's get started....
1. If God is love (1 John 4:8), why are babies sent to burn in hell forever if they're not baptised? How is this 'loving'?
Where do you get this from? Quote the scripture instead of shooting in the air. If you are clueless about the teachings of the bible then you must keep quiet and learn as a honest truth seeker.
By the way, if Allah is love. Show us one ayat which says Allah loves his creation and you. Also, if Allah is love why does he create some human beings or allow them to be born who are destined for Hell (Quran 7:178-179 & Sahih Muslim 33.6436). Again, if Allah is love then why does he allow satan to touch every baby(11. Bukhari - Volume 4, Book 54, Number 506)
2. If Mary is the Mother of God and believers are told to Brides of Christ (Revelation 19:7), is the Mother of God, also his bride?
First of all, your question starts with an assumption of Mary being the mother of God. We don’t believe in such blasphemy nor does the bible teach. Mary is just a medium God chose to accomplish his work. Have you heard of “Figures of Speech”? When the bible tells us that the believers are Christ’s bride, we don’t take that in a literal sense. It has a deep spiritual meaning of God’s intimate love towards his creation and only a loving God can say such things. Jesus in his divine essence is a God of all creation (John 1:3) so logically he is God of Mary too. You seem to have grossly misunderstood the trinitarian position.
3. Is God a sexist for coming in the form of a man? Why not as a woman?
I get two things from your question. 1 – Only Jesus came in the form of Man. So you have admitted Jesus is God! Thank you!. 2 – If you deny Jesus being God then you must show me where and when did God came in the form of man?
Is Allah a sexist for attributing masculine pronouns to himself? Why Allah is always called “HE” not “HER” in the Quran?
4. Is God racist for coming as an Israelite, why not as an African, or Indian?
Thank you once again for proving Jesus is God because it was Jesus himself who came as an israelite. Secondly, why not as African or Indian is a strawman argument. Nevertheless, let me respond. God is just and fulfills his promise given to Abraham. God promised Abraham that he will bless the whole world through his descendants and I am sure you have some clue about the bible which says Jacob was an isrealite and was a descendant of Abraham (Genesis 22:17-18). If Jesus was born as an African or Indian he wouldn’t have fulfilled the promise proving himself to be a false God. Thank you once again for proving Biblical God is Just.
By the way, Is Allah racist for making Islam an Arabian religion? Or Racist for choosing Arabic as a divine language for Quran? Why not sanskrit or english?
5. If humans are literally created in the image of God, is the Christian God a hermaphrodite?
Where do you get this from? Provide scriptural evidence. Genesis 1:24 says, God created man in his image and likeness. Do you take these things literally? Image and likeness talks about the essence of God like Goodness, holiness, love, free will etc. Genesis 1:1-2 proves God is a Spirit. Why don’t you read the bible instead of asking such senseless questions and stand exposed like this?
6. Why does Christ not speak of a punishment for rape, murder or incest? Since the gentiles aren't meant to follow the Mitzvot - they live under grace and not the law, why didn't Christ mention that these things were sins or crimes, or even mention their punishments?
Again a stupid and baseless attempt. Jesus in Matthew 5:27-28 talks about adultery which is considered worse in his sight and Jesus talks about the eternal punishment of rape and adultery in Matthew 5:29 (Includes incest and all form of immoral sexual lust). Also, bible teaches us to practice self control unlike Quran’s teaching of veiling woman huh?. Concerning Murder, here’s the beautiful teaching of Jesus. You are destined to hell even if you call your brother a Fool or Raca Matthew 5:22 for the Murder is an effect of anger that proceeds from your heart. You have no clue about the teachings of the bible. Jesus’s teaching is purely a model of Morality unlike Allah who hastens to fulfill the lustful desires of Muhammad.
By the way, Why was Allah approving Paedophilia (Aisha), Incest (Zainab) and Murder (Loads of ayat I can quote), Cheating wife (Hafsa and Slave Girl) I can go on...
7. Where does God speak of the hypostatic union in the Old Testament or the New Testament?
Why should he speak of? What is your point? (will respond once he clarifies his position)
8. Where did Christ command Christians to believe in the Trinity, Hypostatic Union or Crucifiction in order to be saved?
Jesus teaches trinity in Matthew 28:19 and many more. Hypostatic union – Read the Gospel of John in its entirety. Crucifixion – Are you kidding me? Matthew 16:21-28, John 3:16, John 10:28, Jesus would never contradict himself.
9. If Christ has two wills (human and Godly), how do you determine which act was done with Godly intent and which was done with human?
First of all, whatever Jesus did was all in a Godly intent while he practiced human limitations. Jesus displayed his human limitations but never intended anything in a materialistic manner. I hope you know the difference between intent and limitations.
10. Where does Christ teach that he has two wills?
Actually Christ does have two wills in one person. As he said, not my will but your will be done. Luke 22:42 Saying, Father, if thou be willing, remove this cup from me: nevertheless not my will, but thine, be done.
11. Answers are welcomed, I'm sure there are some who can give some interesting responses. and God knows best
You have been Answered, I am not sure whether my answers are interesting but certainly it exposes your senseless and baseless arguments. And God knows best.
Conclusion: Jesus didn't preach Islam, didn't preach circumcision, didn't preach about mecca, didn't preach about Allah, didn't preach about Quran, Didn't say anything about Muhammad. Why should Christians even listen to your dawah?